मुख्यपृष्ठस्तंभहनीफनामा : था नन्हा लेकिन निराला!

हनीफनामा : था नन्हा लेकिन निराला!

हनीफ जवेरी
साहस सबके बस की बात नहीं होती। जो निडर होकर अपने विचार खुलकर किसी के भी सामने रखे, ऐसा व्यक्ति सच्चा आत्मविश्वासी कहलाता है। और ऐसा आत्मविश्वास साठ के दशक में एक मासूम बच्चे में देखा गया, जो अपनी इसी अदा के कारण छोटी उम्र में ही स्टार बन गया। जी हां, मैं बाल कलाकार जूनियर मेहमूद की बात कर रहा हूं।
लगभग पांच साल का नईम (जूनियर महमूद) अपने फिल्म स्टिल फोटोग्राफर भाई के साथ स्टूडियो शूटिंग देखने गया। वहां एक सीन फिल्माया जा रहा था, जिसमें हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर स्कूल के अध्यापक बने बच्चों की कक्षा ले रहे थे। एक बच्चा उनके सामने डायलॉग नहीं बोल पाया और दो बार सीन री-टेक हुआ। तभी निर्देशक के ठीक पीछे खड़े नईम ने कह दिया –
‘एक आसान संवाद भी नहीं बोल पा रहा है?’
यह सुनकर निर्देशक ने पलटकर नईम से पूछा –
‘बेटा, क्या तुम यह संवाद बोल सकते हो?’
नईम ने हामी भर दी। बस फिर क्या था, सीन नईम पर फिल्माया गया और एक ही बार में ठीक हो गया।
हास्य कलाकार जॉनी वॉकर के सामने नईम ने जिस ढंग से संवाद कहा, उस पर सभी हंस पड़े और यहीं से रूपहले परदे पर एक नए हास्य अभिनेता का जन्म हुआ।
लेकिन जॉनी वॉकर के साथ वाली फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई। उसी अधूरी फिल्म के कारण उन्हें सावन कुमार की फिल्म नौनिहाल मिली, जहां पहली और आखिरी बार उनका नाम परदे पर मास्टर नईम लिखा गया।
इसके बाद उन्हें महमूद के साथ फिल्म सुहागरात करने का मौका मिला। तभी महमूद ने अपनी बेटी जिन्नी का पहला जन्मदिन मनाने का पैâसला किया। सबको बुलाया गया, बस नईम छूट गए। नईम ने बेधड़क महमूद से कह दिया-
‘अंकल, आपने मुझे इसलिए नहीं बुलाया क्योंकि मैं गरीब हूं।’
महमूद मुस्कराए और नईम को भी बुला लिया। नईम ने उनसे वादा लिया कि वे जन्मदिन पर एक कार्यक्रम करेंगे। फिर उन्होंने अपनी पड़ोस की सहेली को ‘हेलेन’ बनाकर साथ ले गए और खुद लुंगी-बनियान पहनकर गुमनाम फिल्म का अंदाज अपनाया। गाना ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं… पर नाचकर उन्होंने पूरी महफिल का दिल जीत लिया।
महमूद को देर नहीं लगी यह समझने में कि नईम कोई साधारण बच्चा नहीं, बल्कि प्रतिभा और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उसी महफिल में महमूद की मुलाकात नईम के पिता से हुई, जो उन्हें साथ लाए थे।
अगले दिन उन्होंने नईम को उनके पिता के साथ रणजीत स्टूडियो बुलाया। वहां उन्होंने नईम के हाथ में धागा बांधा और कहा –
‘आज से मैं तुम्हारा गुरु और तुम मेरे चेले।’ फिर महमूद ने अपने नाम से जोड़कर उन्हें स्क्रीन नेम जूनियर महमूद दिया। इस मौके पर जूनियर महमूद ने गुरु दक्षिणा के रूप में महमूद को सवा पांच रुपया अर्पित किया और इस तरह मास्टर नईम जूनियर महमूद बन गए।
अब चूंकि उसी दौरान जूनियर महमूद, अभिनेत्री राजश्री के साथ फिल्म सुहागरात के अलावा फिल्म ब्रह्मचारी भी कर रहे थे, लिहाजा राजश्री ने निर्देशक भप्पी सोनी से जूनियर महमूद के उस नृत्य की खूब तारीफ की, जो उन्होंने महमूद की बेटी गिन्नी के जन्मदिन पर किया था। नतीजा यह हुआ कि भप्पी सोनी ने फिल्म गुमनाम का वही नृत्य जूनियर महमूद पर फिल्म ब्रह्मचारी के लिए फिल्मा दिया।
फिल्म सुहागरात से कुछ महीने पहले फिल्म ब्रह्मचारी रिलीज हो गई और जूनियर महमूद सफल बाल कलाकार बन गए।
आगे चलकर जब मैंने महमूद की जीवनी महमूद – अ मैन ऑफ मेनी मूड्स लिख रहा था, तब महमूद के साथ-साथ मेरी गहरी दोस्ती जूनियर महमूद से भी हो गई और हमारा मिलना समय-समय पर तब तक होता रहा, जब तक वे जीवित रहे। अफसोस, ८ दिसंबर २०२३ को जूनियर महमूद ने रात २ बजे वैंâसर की बीमारी के चलते अपनी आखिरी सांस ली। और आधी रात को सबसे पहले यह दु:खद खबर मुझे उनके परिवार की ओर से दी गई।

अन्य समाचार