हनीफ जवेरी
जब कोई बड़ा कलाकार किसी बड़ी फिल्म में काम करने से मना करता है, तो उसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। हो सकता है कि उसे जितने पैसे चाहिए हों, उतने पैसे निर्माता न दे रहा हो या फिर जो किरदार उसे दिया जा रहा हो, वो उसे पसंद न आया हो। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जब निर्माता फिल्म की शूटिंग करना चाहता है, वो तारीखें एक्टर के पास उपलब्ध नहीं होतीं।
लेकिन अपने समय की जानी-मानी अभिनेत्री वैजयंतीमाला ने फिल्म निर्माता गुलशन राय और निर्देशक यश चोपड़ा की मशहूर फिल्म ‘दीवार’ में काम करने से मना कर दिया था और इसके पीछे उनकी कुछ निजी वजहें थीं। हालांकि, उन्हें इस फिल्म को छोड़ने का कोई अफसोस नहीं हुआ।
उनकी वो निजी परेशानी क्या थी? ये बताने से पहले ये जानना जरूरी है कि उन्होंने १९५१ में आई फिल्म ‘बहार’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी और १९७० में आई फिल्म ‘गंवार’ उनकी आखिरी फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए दूरी बना ली थी।
पांच वर्ष के लंबे अंतराल के बाद फिल्म ‘दीवार’ से उनकी वापसी तय मानी जा रही थी। जब लेखक सलीम-जावेद ने उन्हें उनका पात्र सुनाया, तो वह अत्यंत प्रभावित हुईं। उन्हें बताया गया कि इस फिल्म में वह अमिताभ बच्चन और नवीन निश्चल की मां की भूमिका निभाएंगी।
वह ‘दीवार’ की कथा-वस्तु से इस कारण भी प्रभावित हुईं, क्योंकि यह फिल्म उनकी ही फिल्म ‘गंगा जमुना’ से प्रेरित थी। किंतु इससे पहले कि वह अपनी ओर से ‘हां’ करतीं, उधर नवीन निश्चल ने अमिताभ के साथ द्वितीय प्रधान भूमिका निभाने से इनकार कर दिया। इसका कारण यह था कि फिल्म ‘परवाना’ में वह अमिताभ के साथ पहले ही मुख्य भूमिका निभा चुके थे। हालांकि, बाद में उन्हें जबरदस्त पछतावा हुआ क्योंकि ‘दीवार’ के रवि वर्मा का पात्र भी दमदार था। जैसे ही नवीन निश्चल के स्थान पर शशि कपूर को लिया गया, वैजयंतीमाला ने बगैर कारण बताए फिल्म में काम करने से मना कर दिया। उन्हें ज्ञात था कि शशि कपूर उनके साथ परदे पर अभिनय करना पसंद नहीं करेंगे और अगर शशि ने उनके साथ काम करने से इनकार किया तो एक तरह से उनका अपमान होता।
दरअसल, जब फिल्म ‘संगम’ की शूटिंग चल रही थी, तब वैजयंतीमाला और राज कपूर के बीच प्रेम-संबंध की चर्चाएं होने लगी थीं। जिसे लेकर कपूर पैâमिली में जबरदस्त टेंशन पैदा हुई थी और ग़ुस्से में कृष्णा राज कपूर (राज कपूर की पत्नी) अपने बच्चों समेत रूठकर मुंबई के एक होटल में रहने चली गई थीं। बाद में उनके ससुर पृथ्वीराज कपूर और भाई प्रेमनाथ उनको मनाकर घर वापस ले आए थे और पूरा परिवार उनके साथ खड़ा हुआ। इसके बाद कपूर परिवार ने वैजयंतीमाला का सामाजिक बहिष्कार करते हुए यह निर्णय लिया कि परिवार का कोई भी सदस्य उनके साथ काम नहीं करेगा। इसलिए शशि कपूर का उनके साथ स्क्रीन पर नजर आने का सवाल ही नहीं था। कपूर परिवार और वैजयंतीमाला के बीच के मतभेदों का जिक्र लेखिका मीना अय्यर ने ऋषि कपूर की जीवनी ‘खुल्लम खुल्ला’ में किया है। खुद ऋषि ने भी मीडिया में वैजयंतीमाला के खिलाफ खुलकर बयान दिए थे, जिस पर वैजयंतीमाला चुपचाप रह गई थीं। हालांकि, मजबूरी में शम्मी कपूर ने उनके साथ फिल्म ‘प्रिंस’ की क्योंकि वह फिल्म उनके मिनर्वा सिनेमा के सहयोगी एफ.सी. मेहरा बना रहे थे, जिसके लिए कपूर फैमिली में शम्मी का भी कड़ा विरोध हुआ था।
फिल्म इंडस्ट्री में यह देखा गया है कि जब कोई नामी आर्टिस्ट किसी फिल्म को छोड़ देता है, तो उस छोड़े गए रोल का फायदा उस कलाकार को मिलता है, जिसे वह भूमिका मिलती है। फिल्म ‘दीवार’ से वैजयंतीमाला का अलग होना, अभिनेत्री निरूपा रॉय के लिए फायदेमंद रहा और वे पर्दे पर अमिताभ की स्थायी मां के रूप में लोकप्रिय हो गर्इं।
