हिमांशु राज़
अभिनेत्री व कवयित्री प्रिया मलिक अपनी अनूठी पहचान खुद रचती हैं। ‘ये काली काली आंखें’, ‘सावित्री देवी कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ और ‘बिग बॉस सीजन 9’ जैसे लोकप्रिय शोज़ से सुर्खियां बटोर चुकीं प्रिया लाइव परफॉर्मेंस की दुनिया में वैश्विक स्तर पर जानी जाती हैं। अपने सफर को स्मृति की डोर से जोड़ते हुए वे बताती हैं, “बचपन से ही लाइव परफॉर्मेंस मेरा जुनून रहा। स्कूल के एलोक्यूशन, डिबेट्स से शुरू होकर सांस्कृतिक गतिविधियां मेरी दिनचर्या बनीं। करीब दस वर्ष पूर्व मैंने अपनी रचनाओं को मंच पर उतारना शुरू किया।”ऑस्ट्रेलियन पोएट्री स्लैम जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से भारत लौटकर प्रोफेशनल सफर तेज हुआ। 2017 के बाद वे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता जैसे महानगरों से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक भारतीय प्रवासियों के बीच लोकप्रिय हो गईं। उनके सोलो शो डेढ़ घंटे के होते हैं—कविताओं का संग्रह, अनूठा स्टाइल और सिग्नेचर स्टोरीटेलिंग से सजा एक वन-वुमन अनुभव।शोज़ की यूएसपी पर प्रिया मुस्कुराते हुए कहती हैं, “सब कुछ मेरे नियंत्रण में होता है। मैं लिखती हूं, निर्देशन करती हूं और परफॉर्म भी खुद। यही ऑथेंटिक प्रिया मलिक का जादू है।” दर्शकों की प्रतिक्रिया उन्हें प्रेरित करती है। “लोग कहते हैं, मेरी रचनाएं भावनाओं को छू जाती हैं। हंसी, आंसू, सन्नाटा, तालियां—हर प्रतिक्रिया मेरी परफॉर्मेंस को निखारती है। कमरे की ऊर्जा शब्दों को जीवंत कर देती है।”लाइव परफॉर्मेंस में अभिव्यक्ति की ताकत पर वे जोर देती हैं, “आवाज़, टाइमिंग, भाव-भंगिमा शब्दों को मंच पर सांस देती हैं। दर्शकों का हर रिएक्शन उस पल को अनोखा बना देता है।” साहित्यिक गुणवत्ता और थिएट्रिकल प्रभाव के संतुलन पर पूछे जाने पर प्रिया कहती हैं, “कविताएं काग़ज़ पर मजबूत हों और मंच पर जीवंत। तीनों भूमिकाएं—लेखक, निर्देशक, परफॉर्मर—खुद निभाने से यह संतुलन सहज हो जाता है। दर्शक और मैं दोनों को इससे संतुष्टि मिलती है।”प्रिया मलिक का जादू शब्दों में बसता है, जो मंच पर दिलों को जीत लेता है।
