फिरोज खान
यौन शोषण का दोषी ४५ साल का राम भवन एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था। नौकरी पाने से पहले राम भवन छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना खर्च चलाता था। साल २००९ में सिंचाई निर्माण खंड में उसकी नौकरी लग गई। राम भवन मई २००९ से नवंबर २०२० में गिरफ्तार होने तक नौकरी में रहा।
उसकी पत्नी दुर्गावती एक गृहिणी थी। रामभवन के पड़ोसियों के मुताबिक, दोनों मोहल्ले में लोगों से बहुत कम बात करते थे। घर में राम भवन पत्नी और एक बच्चे के साथ रहता था। कार से एक दो बार बच्चों को आते-जाते देखा गया, लेकिन वो बच्चे बाहरी थे। इस बीच सीबीआई को ३१ अक्टूबर २०२० को एक गुप्त सूचना मिली थी कि चित्रकूट और आसपास के जिलों में कुछ नाबालिग बच्चों का संगठित रूप से यौन शोषण किया जा रहा है। सूचना देने वाले व्यक्ति ने एक पेनड्राइव भी उपलब्ध कराया, जिसमें ३४ वीडियो और ६७९ यौन हिंसा की तस्वीरें थी। सभी पीड़ित बच्चों की उम्र ५ से १५ साल थी। जांच एजेंसी ने इन वीडियो और तस्वीरों में राम भवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को नाबालिगों के साथ यौन हिंसा करते हुए पाया। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि सिंचाई निर्माण खंड कर्वी चित्रकूट में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात राम भवन का कार्यक्षेत्र चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और महोबा जिले तक पैâला हुआ था। आरोपी नाबालिग बच्चों को पढ़ाने, कंप्यूटर सिखाने, मोबाइल देने या अन्य लालच देकर घर बुलाता था। वहां कपड़े उतरवाकर उनके साथ यौन अपराध करता था और उसका वीडियो बनाकर सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स डार्क वेब, स्काइप और मेल के जरिए भारत के अलावा विदेशों में भी शेयर किया जाता था। नाबालिग बच्चों का अश्लील वीडियो सिर्फ राम भवन नहीं भेज रहा था, बल्कि बाहर से इसे भी वीडियो भेजा जा रहा था। वो नाबालिग बच्चों का वीडियो यूरोप के लगभग सभी देश, बांग्लादेश, श्रीलंका और देश के अंदर दूसरे राज्यों में भी शेयर कर रहा था। राम भवन की पत्नी दुर्गावती के बारे में पीड़ित बच्चों ने अदालत के सामने दिए गए बयानों से पता चला कि दुर्गावती वहां मौजूद रहती थी, जहां राम भवन बच्चों के अश्लील वीडियो बनाता था और सेक्स करता था। कोर्ट के सामने पीड़ितों में से कुछ ने अपने बयान में यह भी बताया कि पीड़ित बच्चों के साथ दुर्गावती भी संबंध बनाती थी। एक पीड़ित बच्चे ने अपने बयान में यह भी बताया, जब राम भवन उसके साथ गलत काम करता था तो उनकी पत्नी वहीं पर रहती थी। राम भवन अंकल गलत काम करने के बदले उन्हें पैसे और दुर्गावती आंटी खाने को अच्छी-अच्छी चीजें देती थी। उनके पास वीडियो गेम प्लेयर, सीडी वाली तीन-चार वीडियो गेम थीं। वह हमें खेलने के लिए देती थी। शर्म और डर के कारण यह बात घर में नहीं बताई थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ‘राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती ने अपने किराये के घरों में रहकर यह जघन्य अपराध लगभग १० साल तक किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, दोषी राम भवन और दुर्गावती का यह अपराध, रेयर ऑफ द रेयरेस्ट अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे अपराध के लिए मृत्यु-दंड से दंडित किया जाना ही भारतीय न्याय प्रणाली में लोगों के विश्वास को कायम रख सकता है।
