उमा सिंह
आपने कभी न कभी `गधे को भी बाप बनाना पड़ता है’ वाली कहावत जरूर सुनी होगी। मौजूदा हालात में यह कहावत पाकिस्तान पर बिलकुल सटीक बैठती नजर आती है। एक ओर जहां पाकिस्तान खुद को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी अपनी जनता महंगाई, बेरोजगारी और भुखमरी से जूझ रही है। अमेरिका-ईरान के बीच ‘मध्यस्थ’ बनने का सपना देखने वाला पाकिस्तान यह भूल गया कि उसके अपने घर में चूल्हे ठंडे पड़े हैं। जनता के पास न रोजगार है, न राहत, लेकिन हुक्मरान वैश्विक राजनीति में ‘हीरो’ बनने में चले थे। जब हकीकत ने आईना दिखाया तो पाकिस्तान सीधे चीन के दरबार में जा पहुंचा। और वहां जो सौदा हुआ, वो हैरान करने वाला है।
दरअसल, हर खेमे में अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान अब देश की अर्थव्यवस्था संभालने के लिए गधों का सहारा लेने जा रहा है। जी हां, पाकिस्तान ने चीन को गधों के मांस और खाल के निर्यात की मंजूरी दे दी है। ग्वादर पोर्ट पर बैठी चीनी कंपनी ने जब आंख दिखाई तो इस्लामाबाद की कुर्सियां ताबड़तोड़ हिल गईं। पहले फाइल अटकी थी, फिर आदेश आया और देखते ही देखते गधों की ‘कुर्बानी’ पर फाइनल मुहर लग गई। क्योंकि डर यह था कि कहीं चीन के `आका’ यानी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नाराज न हो जाए। अब आपके भी जहन में ये सवाल आ रहा होगा कि भला चीन को पाकिस्तानी गधों की क्या जरूरत पड़ गई? इसकी वजह है ‘एजियाओ’, यह एक ऐसी पारंपरिक दवा है, जिसके लिए गधों की खाल उबालकर जिलेटिन तैयार किया जाता है। हजारों साल पुरानी इस दवा की मांग अब इतनी बढ़ चुकी है कि गधे भी ‘ग्लोबल ट्रेड’ का हिस्सा बन गए हैं। इसके अलावा जैसे पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुनीर को चीन चमचागीरी बहुत पसंद है, ठीक वैसे ही चीनी लोगों को पाकिस्तानी गधों का मांस बहुत पसंद हैं। अब हालत यह है कि पाकिस्तान में इंसान भूखा है, लेकिन गधे ‘निर्यात योग्य संपत्ति’ बन चुके हैं। सवाल यह है कि क्या एक देश अपनी अर्थव्यवस्था को ऐसे पैâसलों के सहारे खड़ा कर सकता है? या यह सिर्फ दबाव में लिया गया एक और पैâसला है?
सच यही है कि यह सिर्फ गधों की कहानी नहीं है, यह उस व्यवस्था की कहानी है, जहां सत्ता बचाने के लिए किसी को भी कुर्बान किया जा सकता है। अब ये तो पाकिस्तान ही जानें कि वह देश चला रहा है कि हालात उसे चला रहे हैं?
वैसे, किसी देश की जीडीपी गधों के भरोसे हो तो ये वाकई गजबे है रे बाबा…!
