-अवधी मंच ने आयोजित की संगोष्ठी
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
हिन्दी साहित्य में निराला का बिम्ब विधान सबसे अलग है । उन्होंने असंतोषपूर्ण वातावरण में रहकर अपनी नूतन काव्याभिव्यक्ति द्वारा विद्रोही स्वर फूँका और जनजागरण की नवज्योति जगाने का पुनीत कार्य किया। यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु ने कहीं।
वह चर्चित साहित्यिक संस्था अवधी मंच के कार्यालय विक्रम भवन में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
संत तुलसीदास पीजी कालेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ करुणेश भट्ट ने संगोष्ठी में कहा कि निराला अपने जीवन के संघर्षों को देश काल व समाज के संघर्षों के साथ एकाकार कर लेते हैं। इसी कारण उनका अपना भोगा हुआ सत्य जब कागजों पर उतरता है तो उसके तीखेपन को पचा पाना सरल नहीं रह जाता है।
राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि निराला राष्ट्रवादी कवि हैं। उन्हें केवल प्रगतिवादी या छायावादी कहना उनके साथ अन्याय करना होगा। निराला की कविता तुलसीदास में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का स्पष्ट संदेश है। उनकी कविताएं राम की शक्ति पूजा, दिल्ली, जागरण, यमुना के प्रति व शिवाजी का पत्र आदि यह साबित करती हैं कि निराला राष्ट्रीय चेतना के अपराजेय नायक हैं।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने कहा कि जीवन भर अभावों और संघर्षों से जूझते हुए निराला ने कालजयी कृतियों की रचना की ।
इस अवसर पर युवा साहित्यकार पवन कुमार सिंह,ध्यानेन्द्र विक्रम सिंह ऋषि, सुषमा रानी सिंह व विश्वेंद्र विक्रम सिंह वेदांत आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
