मुख्यपृष्ठनए समाचारजोगेश्वरी ट्रॉमा अस्पताल में ‘महाघोटाला’ ...जाली हस्ताक्षर फर्जी डॉक्टर!

जोगेश्वरी ट्रॉमा अस्पताल में ‘महाघोटाला’ …जाली हस्ताक्षर फर्जी डॉक्टर!

७० चिकित्सक बिना इंटरव्यू भर्ती करोड़ों की मशीन पड़ी बेकार!
भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी महायुति की व्यवस्था
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के जोगेश्वरी ट्रॉमा केयर अस्पताल में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और फर्जीवाड़े की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। इसमें जाली हस्ताक्षर कर वेतन निकालना, बिना इंटरव्यू ७० डॉक्टरों की अवैध भर्ती, करोड़ों की चिकित्सा मशीनों को धूल खाने छोड़ देना आदि शामिल हैं। इतना ही नहीं, १२ करोड़ रुपए की महंगी डीएसए मशीन ४.५ वर्षों में केवल २११ मरीजों पर इस्तेमाल हुई, जबकि गंभीर हृदय मरीजों को अब भी दूसरे अस्पताल भेजा जा रहा है। यह एक तरह से महाराष्ट्र की महायुति सरकार की कथित स्वच्छ प्रशासन की छवि को सीधा झटका दे रहा है। उल्लेखनीय है कि मुंबई के जोगेश्वरी पूर्व स्थित हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ट्रॉमा केयर मनपा अस्पताल में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों के उपकरणों की बर्बादी को लेकर महाराष्ट्र विधान परिषद में आधिकारिक रूप से बड़ा मामला उठ चुका है। पक्ष और विपक्ष के सदस्यों द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद अब साफ होता जा रहा है कि यह सिर्फ कोई साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि संगठित और संरक्षित घोटाला है, जिसमें भर्ती से लेकर वेतन वितरण तक हर चरण में फर्जीवाड़ा किया गया। मनपा के आधिकारिक दस्तावेज बता रहे हैं कि ट्रॉमा सेंटर में आउटसोर्सिंग के नाम पर १०५ कामगारों की भर्ती में भारी अनियमितता हुई। सबसे बड़ा धमाका यह है कि ७० डॉक्टरों को बिना किसी इंटरव्यू के सीधे सेवा में लिया गया। इनमें से कई काम पर आते ही नहीं थे, लेकिन जाली हस्ताक्षर लगाकर वेतन निकाल लिया जाता था। यह सब उस अवधि में हुआ जब ठेका लिपिक और तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक के अधिकार क्षेत्र में नियुक्तियां हो रही थीं।
सरकारी उपकरणों की दुर्दशा
विधान परिषद में पूछे गए सवालों के जवाब में बताया गया था कि अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ उपलब्ध ही नहीं हैं इसलिए गंभीर मरीजों को केईएम, कूपर या नायर अस्पताल भेजना पड़ता है। वहीं १२ करोड़ में खरीदी गई डीएसए मशीन पिछले ४.५ सालों में सिर्फ २११ मरीजों पर उपयोग हुई, यानी लगभग बेकार पड़ी रही। इतना ही नहीं विधायक निधि से २०२२ में जारी वेंटिलेटर खरीद का पैसा मशीन न मिलने के कारण वापस चला गया। एक आधुनिक ट्रॉमा सेंटर को चलाने के लिए जिन सुविधाओं की जरूरत है, वह यहां कागजों में ज्यादा और जमीन पर नदारद है।

इनसाइड नोट में बड़ा खुलासा
डॉ. स्नेहल जाधव के आधिकारिक नोट में सबसे चौंकाने वाला सच सामने आया कि डॉक्टरों को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जाता है, फिर उन्हें आने के लिए नहीं कहा जाता। उनके वेतन से कटौती की जाती है। जोगेश्वरी ट्रॉमा में यही सिस्टम चला इसलिए जांच बैठाई गई है। यह घोटाले का कोर मॉडल उजागर करता है।

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