डॉ. ममता शशि झा
मुंबई
चुनाव जीतला के बाद सरकार के चाँकि भेलई जे अहिमे सँ नकली बहिन सब के छाँटि देबाक चाही।
ओहुना अगिला चुनाव तक ई सब बिसरी जायत, कोनो आर नामक प्रोजेक्ट के बनाक छँटलाहा बहिन सबके चुनाव सँ कनिक दिन पहिने थोड़-बहुत पाई दे क फेर लालच के जालमे कोना के फसायल जाई से नेता आर हुनकर सबहक प्लानिंग कर बला टीम सब खूब नीक जकाँ बूझि गेल छलखिन। प्रâी में जनता सबके जेह भेट जायत ताहिमे खुश रह के मानसिकता सँ परिचित भ गेल छथिन। जनतो ‘जेह हाथ सेह साथ ‘बला बात बुझि गेल छई। जनता के बुझल छई जे आबक सरकार देशक उन्नति के लेल, देशक विकास के लेल नहि चुनाव जितई छई, अपन उन्नति आ विकास चुनाव जीत के उद्देश्य बनि गेल छई नेता सबहक। ताहि लेल जेह भेटि जायत सेह भाग मनाऊ। चुनावक बाद त गदहा के सिंग जकॉ गायबे होब बला सब छथिन नेता लोकनि। भोटर आ नेता के बीच जबरदस्त तालमेल आई काल्हि भ गेल छई। आब चुनाव जितला के बाद बहीन सबहक जरुरत नहीं छलनि, ओहुना समाजक ढर्रा छई बहिन-बेटी काजे परोजनमे बहुतो घरमे मोन पड़ई छनि आ काजक बाद होई छनि जे कखन चलि जाय, आ नेता सब ओहि सँ अलग थोड़े छथिन। त चुनाव खतम, आ योजना में छान-बीन शुरू। पहिने ते केवायसी, के नाम पर छंटनी भेल, जाहिमे जिनका असलमे भेटके चाहई छलनि से सब पढ़ल आ चलाक छलई, ओ सब बचि गेल, आ जे असली गरीब छल, जेनाकि अज्ञानता आ गरीबी के संग सदा बनल आबि रहल छई, ओ सब छँटा गेल। ओहुमे छोटका नेता सबहक कमाई भेलई, फारम भरमे आ पाई ले के पाई दियाब मे। हमरा तए बुझना जाईया जे सरकार नबका स्कीम सब बनबिते छई जानि बुझि क जे आम जनता नहीं बुझि पबई आ पार्टी के छुटभैया सबहक कमाईके रस्ता खुलल रहई। हँ त हम गप्प करई छलउ लाडली बहीन सबहक। आब जकर सबहक नाम कटि गेल छलई तकरा सबहक अनेरो मोने-मोन, जकरा सबके पाई ओहि योजनामे भेटई छलई ओकरा सबस मोनमोटाव भे गेलई। ओकरा सबके नबका नुआ आ घुमनाई देखि के, जाहिमे ओहो सब संगे रहई छलखिन, ईर्ष्या होब लागल छलनि आ, धीरे-धीरे, दु टा गुट बनि गेल। एकटा जकरा भेटई छलई आ दोसर जिनका नहिं भेटई छलई। साग तीमन बाँटि क खाय बाली सब एक दोसर स दूर भ गेली। हद्द त तखन भ गेलई जहन ई निर्णय सरकार केलक जे एक्कहि परिवार के लाडली बहीनमे सँ दूईए गोटा के अहि योजना के लाभ देल जेतई! आब सोचियऊ जे जाहि घरमे एकटा सासू आ तीनगो पुतहू हेतई ओहि घरक की हाल भेल हेतई!
