मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमहा कृपालु हैं माता

महा कृपालु हैं माता

शीतल अवस्थी

हिंदू धर्म में देवी दुर्गा को शक्ति स्वरूप माना जाता है। कहा जाता है कि नवरात्रि में जो भी दुर्गा की सच्चे मन से उपासना करता है वह ऐसी ऊर्जा और शक्तियों का स्वामी बन जाता है  कि उसका जीवन तमाम दु:ख, मुश्किलों व खतरों से दूर व सुरक्षित रहता है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं में देवी दुर्गा ही जगत की सृजन, पालन और संहार शक्तियों की अधिष्ठात्री मानी गई हैं। इसी वजह से आस्था है कि देवी उपासना सभी सांसारिक और भौतिक सुखों की कामनाओं को पूरा करती हैं। हर सुख व खुशहाली पाने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
शक्ति उपासना के लिए ही महादुर्गा के ९ मंगलकारी और कल्याणकारी रूप बताए गए हैं। नवदुर्गा के रूप में पूजनीय मातृशक्ति हर सांसारिक कामना, जिनमें धन, संतान, सुख, स्वास्थ्य, वैभव और शांति शामिल है, को पूरा करती है। नवदुर्गा इच्छाओं को पूरा करने के साथ-साथ बुरे विचार, आचरण और दुश्मनों का नाश करने वाली भी मानी जाती हैं। देवी कवच के मंत्र नवदुर्गा के स्मरण के वे उपाय हैं, जिनका शुभ प्रभाव बुरा वक्त टाल खुशहाल कर देता है। देवी कवच के स्मरण से पूर्व मातृशक्ति की सामान्य पूजा में लाल गंध, लाल फूल और लाल वस्त्र चढ़ाएं। धूप और दीप प्रज्ज्वलित कर इसका उच्चारण करें। यह मंत्र व कवच बहुत ही प्रभावकारी हैं। उच्चारण में कठिनाई होने पर या नियमों का पालन नहीं कर सकते हैं तो किसी योग्य ब्राह्मण से अपने लिए जप करवाएं।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चंद्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पञ्चमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टकम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।।
अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ता: शरणं गता:।।
न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदु:खभयं न हि।।
जयंती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
धन, संतान बाधा या परेशानियों को दूर करने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
सर्व बाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्य सुतान्वित:।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
भाग्य बाधा दूर करने व सौभाग्य की कामना में इस मंत्र का स्मरण करें-
देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
हर तरह से बलवान बनने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
सृष्टिस्थितिविनाशानं शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोस्तुते।।।
अंत में माता से जीवन के भय, बाधा से रक्षा कर सुख से भरने की प्रार्थना करें।

अन्य समाचार