रु. १० हजार में बिकने का शक
सुनील ओसवाल / मुंबई
नासिक में एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया है। १२ बच्चों की मां ने अपने दो महीने के नवजात को यह कहते हुए दत्तक दे दिया कि उसके पास दूध खरीदने तक के पैसे नहीं! लेकिन इसी बहाने के पीछे छिपी कहानी ने प्रशासन और पुलिस दोनों में हड़कंप मचा दिया है।
त्र्यंबकेश्वर तालुका के बरड्याची वाड़ी में रहने वाली ‘देवकी’ (बदला हुआ नाम) ने १० अक्टूबर को बच्चे को जन्म दिया था। नियमित जांच के लिए घर पहुंची आशा सेविका को जब नवजात नजर नहीं आया तो मामला वहीं से फूट पड़ा। सेविकाओं के सवाल पर महिला ने साफ कहा- ‘बच्चा मेरे पास नहीं… दत्तक दे दिया। यह जवाब ही पूरे प्रकरण का विस्फोटक मोड़ बन गया।
महिला को थे १२ बच्चे
पूछताछ में महिला ने कबूल किया कि उसके १२ बच्चे हैं- एक मर चुका, तीन दत्तक दे चुकी। उसका दावा है, ‘दूध पिलाने की क्षमता नहीं’ घर में भुखमरी है। लेकिन यह दलील प्रशासन के गले नहीं उतरी। इसी बीच एल्गार संगठन के अध्यक्ष भगवान मधे ने बम फोड़ दिया। उनके मुताबिक, बच्चे को १० हजार रुपए लेकर दे दिया गया था, परिवार खुद यह बात बताता था। इस आरोप ने पूरे केस को सीधा बच्चा बिक्री के शक में बदल दिया।
पुलिस ने बरामद किए ३ बच्चे
नासिक ग्रामीण के एसपी बालासाहेब पाटील ने रातभर चलाए ऑपरेशन में तीनों दत्तक बच्चों को वापस बरामद कर लिया। पाटील ने कहा, ‘हमारे पास अब ११ बच्चे और उनके माता-पिता हैं। हर एक से सख्त पूछताछ चल रही है। किसी भी कोण को छोड़ने वाले नहीं।’
आशा वर्कर की सतर्कता से खुली पोल
आशा सेविकाओं की सतर्कता न होती तो यह प्रकरण अंधेरे में दबा रहता। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच समिति बना दी है। अब जांच यह तय करेगी कि क्या यह गरीबी की मजबूरी थी या फिर नवजातों की काली खरीद-फरोख्त का अंडरग्राउंड नेटवर्क? राज्यभर की निगाहें इस भयावह केस के अगले खुलासे पर टिकी हैं।
