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मुस्लिम वर्ल्ड : तीन द्वीपों पर भिड़ गए मुस्लिम देश!.. ईरान के लिए क्यों है खास 

सूफी खान

ईरान-इजरायल के बीच जहां कभी भी भयानक जंग का अंदेशा बना हुआ है, वहीं ईरान और अरब देश भी आमने-सामने आ गए हैं। सऊदी अरब, ओमान, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत ईरान को ललकार रहे हैं। मामला जमीन से जुड़ा हुआ है। दरअसल, अरब सागर के बीच जमीन के तीन टुकड़ों को ये अरब देश अपना बता रहे हैं। ईरान उसे अपना अभिन्न अंग मानता है।
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी ने ईरान की सख्त आलोचना की है। ईरान ने यूएई के कंट्रोल वाले तीन आईलैंड पर दावा किया है। ये तीन द्वीप हैं ग्रेटर टनब, लेसर टनब और अबू मूसा आईलैंड। ईरान कहता है कि ये तीनों आईलैंड उसके हैं। ये तीन आईलैंड पर्शियन गल्फ या फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और अरब सागर का हिस्सा हैं। साल १९७१ में यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात के बनने से ठीक पहले ईरान ने इन आइलैंड पर कंट्रोल हासिल कर लिया था। दरअसल, ये तीनों आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हैं। ईरान के कंट्रोल वाला ये इलाका दुनिया के २० परसेंट से ज्यादा तेल के गुजरने का अहम रास्ता है। दुनिया भर के लिए कच्चे तेल का एक अहम हिस्सा यहां से गुजरता है। दुनिया को सप्लाई होनेवाला एक तिहाई एलएनजी भी इसी रास्ते से गुजरता है। इस रास्ते को ग्लोबल इकोनॉमी की नाजुक नस भी कहा जाता है। अगर ईरान इस रास्ते को रोक दे तो दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल हो सकती है।
ऐसे में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने ईरान के उन बयानों की कड़ी आलोचना की, जिनमें उसने यूएई के तीन द्वीपों पर दावा किया था। जीसीसी ने इन्हें गलत और बेबुनियाद बताया। इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी संबंधों के नियमों का भी उल्लंघन कहा। खाड़ी देशों ने ईरान से ऐसे दावे बंद करने की अपील की।
जबकि ईरानी फॉरेन मिनिस्ट्री ने दावा किया था कि ये आईलैंड ईरानी इलाके में हैं और इनके आस-पास ईरान की पासदाराने इस्लाम या आईआरजीसी फोर्स का कंट्रोल है। वहीं गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने कहा कि ईरान के बयान गलत, भ्रामक और बेबुनियाद आरोपों से भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान इंटरनेशनल कानून के खिलाफ हैं। खासतौर पर वो नियम, जिनमें किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल ना देने और पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते रखने की बात कही गई है। जीसीसी को इस बात पर भी एतराज है कि ईरान ने जून में कतर पर हमला क्यों किया था।
एक्सपर्ट कहते हैं कि अजीब बात तो यह है कि जब इजरायल ने कतर पर हमला किया था हमास की लीडरशिप को खत्म करने के लिए तब चलती बातचीत के बीच में अरब मुल्क सिर्फ खानापूर्ति करते रहे। लेकिन ईरान ने खुद पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में जब जून में कतर में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को कतर को बाकायदा सूचना देकर निशाना बनाया था तो अरब देश ईरान को नियम-कायदे याद दिला रहे हैं। जानकार सवाल उठाते हैं कि अरब मुल्क कभी भी इजरायल और अमेरिका को नियम-कायदे याद दिलाने की हिम्मत क्यों नहीं कर पाते?
जीसीसी से जुड़े सऊदी अरब, ओमान, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत ने एक मीटिंग की है, जिसके बाद ईरान को धमकाया है कि वो इन तीन आईलैंड पर अपना हक ना जताए, ये यूएई के हैं। लेकिन ईरान इन्हें रणनीतिक नजरिए से भी अपने लिए बेहद अहम मानता है। ऐसे में आगे आनेवाले दिनों में इसको लेकर मिडिल ईस्ट में नया विवाद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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