मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: अब कब्र पर फातिहा पढ़ने को लगी कतारें!

मुस्लिम वर्ल्ड: अब कब्र पर फातिहा पढ़ने को लगी कतारें!

सूफी खान

-ईरान में खामेनेई के लिए गजब दीवानगी

कहते हैं दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जो लोगों के दिलों में घर कर जाते हैं, पीढ़ी दर पीढ़ी उनके विचारों को लोग याद रखते जाते हैं। इस तरह वो शख्सियत अपने विचारों से अपने विजन से हमेशा जिंदा रहती हैं। उसी तरह की शख्सियत थे ईरान के सुप्रीम लीडर और दुनिया के करोड़ों मुसलमानों के एक वर्ग के रुहानी पेशवा अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई। जिनकी कब्र ईरान के मशहद में है। जैसी उनकी तदफीन थी यानी जिस खास तरीके से उनका अंतिम संस्कार हुआ। दो देशों में जनाजा गुजरा और करोड़ों लोग इसके गवाह बने। वैसा ही उनका आखिरी मकाम उनकी कब्र है, जहां ईरान के कोने-कोने से लोग पहुंच रहे हैं।
अब हजारों लोग हर दिन मशहद पहुंच रहे हैं, इमाम खामेनेई की कब्र पर फातेहा पढ़ने के लिए। ईरान में मौजूद भारतीय बताते हैं कि मशहद में इमाम खामेनेई की कब्र पर पहुंचने वाले ४-४ घंटे इंतजार करते हैं, ताकि उस जगह को अपनी आंखों से देख सकें जहां उनके रहबर दफ्न हैं। वहां जियारत करके उनके हक में फातेहा पढ़ दुआएं कर सकें। २४ घंटे लोगों के आने का सिलसिला जारी है।
ईरान मामलों के जानकार कहते हैं कि किसी भी विचार या आंदोलन को न तो ताकत के जोर पर दबाया जा सकता है, न तो वक्त हालात और सियासत की गर्द से धुंधला किया जा सकता है, बल्कि कुछ नाम किताबों से निकल कर लोगों की जबान और फिर दिलों में बस जाते हैं। कुछ शख्सियत ऐसी होती हैं, जो तस्वीरों से निकलकर एहसास बन जाती हैं। उनकी पूरी जिंदगी ही एक तहरीक, एक आंदोलन बन जाती है। ईरान में लोग मानते हैं कि आप किसी इमारत को गिरा सकते हैं, किसी सच को छिपा सकते हैं, किसी को सत्ता से हटाया जा सकता है, किसी महल को मटियामेट किया जा सकता है, यहां तक कि किसी इतिहास को भी दबाया जा सकता है। लेकिन किसी नजरिए को मिटाया नहीं जा सकता। अगर कोई विचार, कोई नजरिया दिलों में जगह बना ले तो वो नस्ल दर नस्ल आगे बढता चला जाता है। विचारों की उम्र किसी इंंसान की उम्र से कहीं ज्यादा होती है। जानकार कहते हैं कि अयातुल्लाह अली खामेनेई भी एक विचार एक नजरिया थे। मौत इमाम खामेनेई के जिस्म को आई है, उनके नजरिए को नहीं। उनकी कब्र पर आज भी रौनकें हैं और ये सिलसिला सदियों चलता रहेगा।

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