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मुस्लिम वर्ल्ड : अमेरिका से भिड़ने को तैयार! …खामेनेई ने सेना में कर दिया बड़ा बदलाव 

सूफी खान

मिडिल ईस्ट या वेस्ट एशिया में जंग की आशंका लगातार बनती जा रही है। अमेरिका से सीधे टकराव और देश के अंदर भड़कते विद्रोह के बीच ईरान ने अपनी सेना में एक ऐसा बदलाव किया है, जो साफ इशारा है कि ईरान अब पीछे हटने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। ईरान ने सेना में तीन बड़े पैâसले लेकर दुनिया और ईरान के दुश्मनों को यह संदेश दे दिया है कि अब बात चेतावनी तक सीमित नहीं, बल्कि जंग की तैयारी अंतिम चरण में है।
जून २०२५ के बाद यह तीसरी बार है जब ईरान ने एक झटके में सेना का चेहरा बदल दिया है। हर बार वजह एक ही रही है और वो है अमेरिका और युद्ध। १३ जून, २०२५ में जब युद्ध के दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे, तब सत्ता और सेना दोनों हिल गए थे। हालांकि, ईरान ने अगले १२ दिनों तक इजरायल से उस अपमान का बदला लिया और उसके कई इलाकों को धुआं-धुआं कर दिया था, लेकिन कहा जा रहा है कि उसकी टीस अब भी बाकी है और अब फिर तगड़ा जवाब देने के लिए ईरान ने फिर से कमान कस ली है। खबर है कि ईरान ने अहमद वाहिदी को सेना का उप-कमांडर बनाकर अमेरिका को आंखों में आंखें डालकर चुनौती दी है। वाहिदी वही शख्स हैं, जिन्हें अमेरिका अपना कट्टर दुश्मन मानता है और जिन्हें वॉशिंगटन ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। अब वही वाहिदी ईरान की सेना में नंबर-२ हैं और पूरे सैन्य ऑपरेशन की चाबी उनके हाथ में है। ये साफ संदेश है कि ईरान अमेरिका से डरने वाला नहीं और उसे वेनेजुएला समझने की भूल ना की जाए।
इतना ही नहीं, मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि ईरान की सेना अब सड़कों पर भी जंग लड़ेगी। ईरान ने सिर्फ सीमा की नहीं, बल्कि भीतरी मोर्चे पर भी तैयारी कर ली है। ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया को सेना का प्रवक्ता बनाकर जनता को काबू में रखने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसका अर्थ है कि ईरान ने प्रदर्शन की आड़ में चल रही अंदरूनी बगावत को भी कुचलने का मन बना लिया है। इसके अलावा पूर्व उप-कमांडर अली फदावी को सलाहकार समूह का मुखिया बनाया गया है। वही फदावी जो अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सबसे आक्रामक सोच के लिए जाने जाते हैं। दरअसल, ईरान में चल रहे महंगाई विरोधी प्रदर्शनों पर अमेरिका ने भी आग में घी डालने का काम किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले मंच से चेतावनी दी है कि अगर ईरान में अत्याचार नहीं रुका तो अमेरिका सीधी घुसपैठ से पीछे नहीं हटेगा। ईरान में अब तक ३३ प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और उंगली सीधे ईरानी सेना पर उठ रही है। यानी अब मामला सिर्फ परमाणु या राजनीति का नहीं, बल्कि खून और सत्ता की लड़ाई बन चुका है। जबकि, ईरान ने पलटवार में साफ कहा है कि जनता को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ईरान में ११ दिन से जारी विरोध प्रदर्शन और दुनियाभर में यह मैसेज जाना कि ये प्रदर्शन इमाम खामेनेई की रिजीम को पलटने के लिए किए जा रहे हैं, ईरान की टेंशन को बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनों से निपटने के लिए ईरान की सरकार एक नई स्कीम लाई है या यूं कहें कि पुरानी स्कीम को फिर से लागू करने जा रही है। इसका नाम है याराने। यह ईरान की एक ऐसी योजना है, जिसके रुकने से ही ईरान का इकोनॉमिक सिस्टम पूरी तरह डगमगा गया है। याराने का मतलब होता है दोस्ती।

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