मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: ४० दिनों की जंग ने अरब देशों को दिखाया आईना!

मुस्लिम वर्ल्ड: ४० दिनों की जंग ने अरब देशों को दिखाया आईना!

सूफी खान

क्या टूटेगा ट्रंप का एक बड़ा सपना?

१९ जून को अगर ईरान-अमेरिका डील फाइनल हुई तो ट्रंप का एक महत्वाकांक्षी ख्वाब टूट जाएगा। वो है अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौता, जिसे अमेरिका के प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में साल २०२० में बनाया था। इसके पीछे ये रणनीति थी कि अरब देश खुलकर इजरायल को मान्यता दें और बाकी मुस्लिम देश भी इसमें शामिल होते चले जाएं।
२०२० में ऐसा वक्‍त आया, जब अमरिका की मध्यस्थता में एक समझौता किया गया, जिसे अब्राहम अकॉर्ड्स के नाम से जाना जाता है। इस समझौते का नाम अब्राहम इसलिए रखा गया क्यों कि अब्राहम यहूदी, ईसाई और मुसलमानों तीनों के एक पैगंबर हैं। जिन्हें यहूदी और इजरायल अब्राहम और मुसलमान हजरत इब्राहिम कहते हैं। अमेरिका का मानना था कि एक पैगंबर के नाम से तीनों अलग-अलग विचार धाराएं एक छाते के नीचे आ सकती हैं। सबसे पहले यूएई और जॉर्डन ने ऐसा किया भी फिर कुछ अप्रâीकी मुस्लिम मुल्क भी इसमें जुड़े। जबकि ईरान चाहता था कि इजरायल के खिलाफ मुस्लिम देश एक हों।
इधर अरब देशों के साथ दिक्कत ये है कि वो हर बार इजरायल से हारते रहे, यही वजह है कि अरब मुल्कों ने आखिरकार उसके नजदीक जाना ही बेहतर समझा। लेकिन ४० दिनों की ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल जंग और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान के कंट्रोल और अब इजरायल के न चाहते हुए भी ट्रंप का डील को लेकर झुकाव देखा जाए तो ६ साल पुराने अब्राहम समझौते का खित्ते में कोई महत्व नहीं रह गया है। इजरायल में भी ईरान की मिसाइलों से हुई भारी तबाही ने अरब देशों को एहसास करा दिया है कि उन्हें इस समझौते से कोई लाभ नहीं हुआ। खासकर यूएई की तो ईरान ने हालत खराब कर दी। यही वजह है कि अरब देश अब ईरान से सुलह समझौता करके अपने-अपने फायदे देख रहे हैं और चाहते हैं कि जल्दी डील हो जिससे हॉर्मुज खुले। होर्मुज और अपनी सुरक्षा को लेकर वो इजरायल से नहीं, बल्कि आगे ईरान से समझौतों की राह तलाशेंगे।
देखा जाए तो मिडिल ईस्ट में जंग के बाद ईरान की जीत से अब्राहम समझौते में अब कोई दम नहीं रहा है। इजरायल का भौकाल हमेशा के लिए खत्म हो गया है और जंग में इजरायल के लिए अमेरिका के प्रेम ने अरब देशों को आईना दिखा दिया है।

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