सूफी खान
‘मैं ना होता तो इजरायल तबाह हो चुका होता, अमेरिका की वजह से ही इजरायल का अस्तित्व है।’ ये कहकर एक बार फिर प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपनी भड़ास पीएम नेतन्याहू पर निकाली है या यूं कहें कि ट्रंप ने फिर नेतन्याहू को जलील करने की कोशिश की है। ट्रंप ने मीडिया से कहा कि उनके जैसा शख्स अमेरिका के प्रेसिडेंट की कुर्सी पर बैठा है इसलिए इजरायल बच गया। उनका इशारा था कि वरना ईरान इजरायल को धूल में तब्दील कर डालता।
लेबनान को लेकर भी ट्रंप इजरायल पर बहुत गुस्सा हैं। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष बहुत लंबे वक्त से चल रहा है और इसमें बहुत जानें जा रही हैं। इजरायल साउथ लेबनान पर हमलों को लेकर अमेरिका की भी नही सुन रहा है। ट्रंप ईरान से डील के सपने संजो रहे हैं, दूसरी तरफ इजरायल लेबनान में बम बरसा रहा है। ईरान पहले ही कह चुका है कि डील तभी होगी जब इजरायल और लेबनान में हिज्बुल्लाह के बीच भी जंगबंदी हो। ऐसे में ट्रंप इजरायल पर और झुंझला रहे हैं।
ट्रंप ने इस बात को मान लिया है कि अब ईरान से अमेरिका की डील में सबसे बड़ा रोड़ा इजरायल है, इजरायल और पीएम नेतन्याहू ट्रंप की सुन नहीं रहे हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके मंत्रिमंडल के कई नेता अमेरिका-ईरान की होने जा रही डील से नाराज हैं। वो ये मानते हैं कि ईरान को सिर्फ ताकत से ही रोका जा सकता है, बातचीत से नहीं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सियासत और ४० दिनों की ईरान के साथ जंग के बाद उसके तेवरों को समझने वाले कहते हैं कि ट्रंप व नेतन्याहू का ये गुस्सा और नाराजगी एक नूराकुश्ती हो सकती है। दरअसल, ट्रंप चाहते हैं कि अब किसी भी तरह ईरान के साथ कोई बड़ा समझौता हो जाए। वो इसे अपनी विदेश नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि के रुप में पेश कर सकें।
ट्रंप को बस ये डर था कि इजरायल की लेबनान में आक्रामकता से कहीं ईरान बिदक ना जाए, इसलिए उन्होंने पब्लिकली और मीडिया के सामने पीएम नेतन्याहू की आलोचना शरू कर दी। जानकार कहते हैं कि ये सिर्फ दिखावा है और कुछ नहीं। वो कोशिश में हैं कि इजरायल और नेतन्याहू को लेकर उनके बयानों से बस ईरान को ये मैसेज चला जाए कि ट्रंप पीस डील को लेकर गंभीर हैं।
ट्रंप बस किसी तरह अपने सबसे बड़े और अब ताकतवर दुश्मन ईरान से समझौता करके निकलना चाहते हैं। अगर ये डील हो गई तो ट्रंप इसका क्रेडिट लेंगे और अगर टूटी तो पीएम नेतन्याहू के सिर ठीकरा फोड़ेंगे ये तय है, फिर भी दोनों के संबंध बिगड़ने वाले नहीं हैं। इस वक्त जो दिख रहा है वो सिर्फ लक्ष्य हासिल करने का एक खेल है।
