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न्यूज स्कैन : उसने ७ परिजनों को कुल्हाड़ी से काट डाला …भारत की पहली फांसी पानेवाली महिला की खौफनाक कहानी

खुशबू सिंह

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का बावनखेड़ी गांव आज भी उस खौफनाक रात को नहीं भूल पाया, जब १४ अप्रैल २००८ को शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के ७ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मां, बाप, दो भाई, एक भाभी, भतीजा और रिश्ते की बहन को उसने दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश किया और फिर कुल्हाड़ी से एक-एक करके काट डाला। ये कहानी आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा देने की है।
हत्याकांड का खौफनाक मंजर
बावनखेड़ी गांव में शबनम के घर की दीवारों पर आज भी खून के धब्बे उस रात की गवाही देते हैं। गांववाले बताते हैं कि रात करीब २ बजे शोर सुनकर लोग पहुंचे तो सात लाशें बिखरी पड़ी थीं। शबनम जोर-जोर से रो रही थी। उसने पहले कहा कि हमलावरों ने घर पर हमला किया। लेकिन पुलिस की जांच में सच सामने आया। शबनम और सलीम ने मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। पुलिस को पता चला कि शबनम ने उस दिन दो किलो दूध लिया था, जिसमें नशीला पदार्थ मिलाया गया।
परिवार का विरोध और प्रेम प्रसंग
शबनम का परिवार पढ़ा-लिखा और संपन्न था। उसके पिता शौकत शिक्षक थे। शबनम ने एमए तक पढ़ाई की थी, जबकि सलीम लकड़ी चीरने की मशीन चलाता था। परिवार को उनके रिश्ते से सख्त नाराजगी थी। गांव के बुजुर्ग रियासत बताते हैं कि शबनम के दादा ने उसके हाथ का खाना तक छोड़ दिया था। छोटे भाई राशिद ने उसे थप्पड़ भी मारा था। शबनम चाहती थी कि परिवार की संपत्ति हासिल कर वो सलीम के साथ जिंदगी बिताए। लेकिन परिवार का विरोध उसे बर्दाश्त न हुआ।
सजा और गांव की चुप्पी
पुलिस ने शबनम और सलीम को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि सातों हत्याएं शबनम ने ही कुल्हाड़ी से कीं, जबकि सलीम ने साजिश में साथ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। राष्ट्रपति ने २०२१ में उनकी दया याचिका खारिज कर दी। शबनम के चाचा सत्तार कहते हैं कि ऐसा गुनाह माफी के काबिल नहीं। गांववाले आज भी इस बात से सहमे हैं। शहजाद खान, जो उस रात मौके पर पहुंचे थे, बताते हैं कि बारिश में लाशें देखकर उनकी रूह कांप गई थी।
गांव में आज भी सन्नाटा
१७ साल बाद भी बावनखेड़ी में इस हत्याकांड की चर्चा होती है। शबनम का घर अब खाली पड़ा है। सात कब्रें पास में ही हैं। गांव की महमूना कहती हैं कि सलीम शांत स्वभाव का था, लेकिन शबनम का गुनाह गांव पर काला धब्बा बन गया। लोग कहते हैं कि शबनम को सजा मिलने में देर हो गई। ये मामला आज भी लोगों के जहन में जिंदा है। शबनम का नाम भारत की पहली महिला वैâदी के तौर पर इतिहास में दर्ज हो चुका है, जिसे फांसी की सजा दी गई।

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