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न्यूज स्कैन : किशोरों में बढ़ती हिंसकता : जवाब नहीं दिया तो गोली मार दी! … हथियारों तक आसान पहुंच

खुशबू सिंह

पिछले महीने, यानी नवंबर में हरियाणा के गुरुग्राम से एक चौंकानेवाली और बेहद दर्दनाक खबर सामने आई, जिसमें ११वीं कक्षा में पढ़नेवाले एक छात्र ने अपने सहपाठी पर गोली चला दी। वजह इतनी-सी बताई जा रही है कि पीड़ित छात्र मोबाइल फोन में व्यस्त था और आरोपी के सवालों को नजरअंदाज कर रहा था। इस घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया, वहीं इस मामले ने किशोरों में बढ़ती आक्रामकता और हथियारों की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कैसे हुआ पूरा मामला?
पीड़ित छात्र की मां के अनुसार, शनिवार को उनके बेटे के स्कूल के एक दोस्त ने उसे मिलने के लिए बुलाया। पहले तो पीड़ित ने मना कर दिया, लेकिन आरोपी ने जिद की और कहा कि वो खुद लेने आएगा। इसके बाद पीड़ित खेड़की दौला टोल प्लाजा पर उससे मिलने गया।
मां का कहना है कि करीब दो महीने पहले पीड़ित और आरोपी के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। उसी रंजिश को आगे बढ़ाते हुए आरोपी ने अपने एक और दोस्त के साथ मिलकर पीड़ित को अपने घर बुलाया और वहां जान से मारने की नीयत से गोली चला दी।
पुलिस के अनुसार, वारदात गुरुग्राम सेक्टर ४८ स्थित आरोपी के घर में हुई। गोली गर्दन में लगी और आर-पार हो गई, जिससे पीड़ित की गर्दन की हड्डी तक टूट गई। कुछ छर्रे शरीर में फंस गए। परिवार का कहना है कि आरोपी पहले भी उसे धमकाता था और इस बार मौका मिलते ही उसने वारदात को अंजाम दे दिया।
क्यों चलाई आरोपी ने गोली?
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने तीन बार पीड़ित से कोई सवाल पूछा, लेकिन वो मोबाइल फोन में व्यस्त रहने के कारण कोई जवाब नहीं दे रहा था। इससे आरोपी को गुस्सा आ गया और उसने गोली चला दी। यह भी सामने आया है कि तीनों छात्र एक ही कक्षा के सहपाठी थे।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश कर दिया और उन्हें फरीदाबाद के एक सुधारगृह में भेज दिया गया।
हरियाणा डीजीपी
का बयान
घटना पर हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि ये अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि किशोर ऐसे कदम उठा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हथियार लाइसेंस धारकों को सतर्क किया जाए और जरूरी प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि उनके हथियारों का दुरुपयोग न हो।
डीजीपी ने यह भी कहा कि ‘वीडियो गेम खेलनेवाली पीढ़ी असल और खेल की गोली में फर्क नहीं समझ पाती। माता-पिता और स्कूलों को बच्चों को संवाद कौशल और विवाद से बचने की सीख देनी चाहिए।’
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है कि किशोरों में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति, मोबाइल की लत और हथियारों तक आसान पहुंच भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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