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सुरक्षा की फिक्र नहीं, राजनीतिक एजेंडा सेट! …खतरे में न पड़ जाएं मुंबईकर!

-अंडरग्राउंड मेट्रो के अंतिम चरण के उद्घाटन की हड़बड़ी
-अधूरे कामों के बीच मोदी के हाथों उद्घाटन की तैयारी
सामना संवाददाता / मुंबई
वर्ली से कफपरेड तक का अंडरग्राउंड मेट्रो का अंतिम चरण ३० सितंबर को शुरू किया जाएगा। वास्तव में इस चरण के मेट्रो स्टेशनों के काम अब भी अधूरे हैं। अधूरे कामों के बीच इस चरण को खोले जाने से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उद्घाटन का दिखावा करने के लिए सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है, जिससे यात्री नाराजगी जता रहे हैं।
गोरेगांव की आरे कॉलोनी के सैकड़ों पेड़ काटकर मेट्रो का कारशेड बनाया गया था। तभी से अंडरग्राउंड मेट्रो का प्रोजेक्ट विवादों में है। फिलहाल, आरे जेवीएलआर से वर्ली आचार्य अत्रे चौक स्टेशन तक मेट्रो सेवा चालू है। इस मार्ग के दूसरे चरण के उद्घाटन में भी सरकार ने जल्दबाजी की थी और पहले ही मानसून में वर्ली मेट्रो स्टेशन पर पानी भर गया। ऐसे हालात में खींचतान के बीच जारी मेट्रो स्टेशनों का काम अब भी पूरा नहीं हुआ है। उद्घाटन में केवल १४ दिन बाकी रहते हुए हुतात्मा चौक, ठाकुरद्वार, मुंबई सेंट्रल जैसे कई स्टेशनों के प्रवेशद्वार के काम अधूरे हैं। लिफ्ट, एस्केलेटर और एंट्री प्वाइंट्स का काम अभी भी जारी है। मेट्रो स्टेशनों के प्रवेशद्वार पर निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है, जिससे स्टेशन के अंदर पानी घुसने का भी खतरा है। दो दिन पहले की भारी बारिश में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन पर पानी टपकने की घटना सामने आई।
ऐसे में जब काम सही ढंग से पूरा नहीं हुआ है, तो क्या केवल राजनीतिक श्रेय के लिए उद्घाटन की इतनी जल्दी की जा रही है? क्या सरकार को यात्रियों की सुरक्षा का कोई महत्व नहीं है? ऐसा कड़ा सवाल यात्री उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा से अधिकारियों में भी भ्रम
वर्ली साइंस म्यूजियम से कफपरेड तक ९.१ किमी के अंडरग्राउंड मेट्रो मार्ग का काम कब तक पूरा होगा, इस पर मेट्रो प्रशासन के अधिकारी भी अनिश्चित थे। इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ३० सितंबर की तारीख घोषित कर दी। प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन की घोषणा से मेट्रो प्रशासन के अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। कई महीनों से अटके पड़े स्टेशनों के काम को अगले १४ दिनों में जल्दबाजी से पूरा करने की कोशिश हो रही है। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि इस जल्दबाजी में घटिया काम कर ठेकेदार अपने फायदे के लिए मौके का लाभ उठा सकते हैं।

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