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विधानमंडल सत्र में बोलने नहीं दिया जाता…मुख्यमंत्री के सामने दो माइक, विपक्षी के सामने एक भी नहीं!.. कांग्रेस प्रतोद का गंभीर आरोप

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार को राज्य में विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष ही नहीं चाहिए। विरोधियों की आवाज को दबाने के लिए पिछले सत्र में विधान परिषद में तो सीधे नेता प्रतिपक्ष के सामने वाला माइक हटाकर उसे मुख्यमंत्री के सामने रख दिया गया। इस तरह का गंभीर आरोप कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य व प्रतोद राजेश राठोड ने लगाया है। विधानमंडल के आगामी सत्र की पृष्ठभूमि में लंबित नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर उन्होंने सरकार पर तीखा हमला किया।
राजेश राठोड ने पिछले सत्र का एक वाकया सुनाते हुए सभापति की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सभापति और नेता प्रतिपक्ष को समान दर्जा होता है। हालांकि, पिछली बार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष को बोलने न दें, इसलिए उनके सामने लगा हमेशा चालू रहनेवाला माइक हटाकर केवल सभापति के नियंत्रण वाला माइक रखा गया, जबकि, दोनों ‘ऑन’ रहनेवाले माइक मुख्यमंत्री को दे दिए गए। सभापति को दाएं और बाएं का भेदभाव नहीं करना चाहिए, फिर भी विरोधियों को सवाल उठाने नहीं दिए जाते।
सामंजस्य से हो सकता है बदलाव
विधायक राजेश राठोड ने कहा कि विधान सभा में शिवसेना की संख्या अधिक है। इसलिए वहां उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद मिलना चाहिए, तो विधान परिषद में कांग्रेस की संख्या अधिक है इसलिए यह पद कांग्रेस को ही मिलना चाहिए। अगर शिवसेना को विधान परिषद का पद चाहिए, तो महाविकास आघाडी में सामंजस्य बिठाकर बदलाव कर कांग्रेस को विधान सभा का पद दिया जाए।
घोषित किया जाए नेता प्रतिपक्ष
राजेश राठोड ने कहा कि महाराष्ट्र की संसदीय परंपरा में कभी भी नेता प्रतिपक्ष का न होना, ऐसा नहीं हुआ। पिछले एक साल से विधान सभा में और अगस्त से विधान परिषद में यह पद खाली रहना महाराष्ट्र के वैभव के लिए शोभनीय नहीं है। विपक्ष का नेता किसान, मजदूर, महिलाओं और युवाओं की आवाज होता है। सभापति को संख्याबल देखते हुए तुरंत इस पद पर घोषणा करनी चाहिए।
सत्तापक्ष बोलने नहीं देता
सदन में होनेवाले गोलमाल पर टिप्पणी करते हुए विधायक राजेश राठोड ने कहा कि हम सवाल पूछने के लिए हाथ उठा-उठाकर थक जाते हैं, लेकिन मौका नहीं दिया जाता। जैसे ही हम बोलने लगते हैं, बेल बजा दी जाती है या सत्ताधारी दल के विधायक गड़बड़ करके हमारी आवाज दबा देते हैं। यह लोकतंत्र के लिए घातक है।

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