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आउट ऑफ पवेलियन : जो सचिन नहीं कर पाए, वो अर्जुन ने किया

अमिताभ श्रीवास्तव

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के पुत्र अर्जुन अपनी मेहनत और लगन के बूते अब क्रिकेट में धीरे-धीरे अपने पैर जमाने लगे हैं। इस क्रम में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है, जो उनके पिता सचिन ने भी नहीं किया था। निश्चित ही यह भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, जब अर्जुन तेंदुलकर ने टी२० सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी-२०२५ में गोवा का प्रतिनिधित्व करते हुए बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों की शुरुआत की है। यह एक दुर्लभ उपलब्धि है, जिसने उन्हें एक खास क्लब में शामिल कर दिया है। यह उपलब्धि गोवा के मध्य प्रदेश के खिलाफ लीग चरण के मुकाबले में हासिल हुई। हाल ही में टी२० में गोवा के लिए सलामी बल्लेबाजी के लिए पदोन्नत हुए अर्जुन को नई गेंद भी सौंपी गई। अपने करियर में पहली बार उन्होंने पारी का पहला ओवर फेंकते हुए सलामी बल्लेबाजी भी की और आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा लिया। जिस दिन उन्होंने इतिहास रचा उस दिन अर्जुन ने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन भी किया। उन्होंने अपने चार ओवरों में ३६ रन देकर तीन विकेट लिए और सलामी बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ १० गेंदों पर १६ रन बनाए। मौजूदा एसएमएटी सीजन में खेले गए पांच मैचों में अर्जुन ने ७० रन बनाए हैं और आठ विकेट लिए हैं, जिससे गोवा टीम में उनकी बढ़ती अहमियत का पता चलता है। टी२० क्रिकेट में स्थायी सलामी बल्लेबाज और इस प्रारूप के शुरुआती सुपरस्टार्स में से एक होने के बावजूद सचिन तेंदुलकर ने कभी भी गेंदबाजी की शुरुआत नहीं की। महान मास्टर ब्लास्टर ने अपने करियर में ९६ टी२० मैचों में सिर्फ ९३ गेंदें फेंकी और केवल दो विकेट लिए। सचिन ने २००६ में भारत का पहला टी२० अंतरराष्ट्रीय मैच खेला और आईपीएल-२०१० में ६१८ रन बनाकर ऑरेंज वैâप जीती, फिर भी उनके टी२० करियर में गेंदबाजी, सलामी बल्लेबाज की भूमिका नदारद रही।
लेडी साइको किलर
किसी महिला का हत्यारा बनना और वो भी मासूम बच्चों का यह एक अजीब बात है। कलियुगी पूतना की तरह एक महिला को बच्चों की हत्या करना पसंद था। जी हां, हरियाणा के पानीपत में सुंदर बच्चों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार ३२ साल की पूनम एक साइको किलर है। वह काफी पढ़ी-लिखी है, उसने राजनीति विज्ञान से एम.ए. किया है। उस पर तीन साल से कम समय (२ साल ११ महीने) में ४ बच्चों की हत्या करने का आरोप है। इन बच्चों में उसका अपना ३ साल का बेटा शुभम और उसकी तीन भतीजियां शामिल हैं। पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि पूनम सुंदर दिखने वाले बच्चों से जलती थी। वह उनकी तुलना अपने बेटे से करती थी। इसी ईर्ष्या की वजह से उसने एक-एक कर चार मासूमों को मौत के घाट उतार दिया। पकड़े जाने के डर से उसने तंत्र-मंत्र, साये और एक मृत युवक की आत्मा का पूरी तरह से झूठा किस्सा गढ़ दिया था। पानीपत के डीएसपी नवीन सिंधु ने साफ कहा कि इस मामले का तंत्र-मंत्र से कोई लेना-देना नहीं है। पूरा मामला साइको किलिंग का है। पूनम हर हत्या के बाद शक से बचने के लिए अलग-अलग बहाने बनाती थी। उसे पता था कि एक दिन वह पकड़ी जाएगी इसलिए पहले से ही ‘साये’ की कहानी तैयार कर रखी थी। पुलिस का कहना है कि कई साइको किलर अपने अपराध को छिपाने के लिए ऐसे ही तंत्र-मंत्र या साये की बातें बनाते हैं, ताकि लोग उन पर आसानी से शक ना करें।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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