अमिताभ श्रीवास्तव
अब यही शेष रह गया था। भारत से लगातार हारने वाली महिला पाकिस्तानी क्रिकेट टीम मर्दों से भिड़ी, ताकि उनका खेल सुधरे। अब ये कौन बताए कि पाकिस्तान की पुरुष टीम भी लगातार हारती ही है। मतलब हारने वाली टीम से क्या लाभ होगा यह तो उनका बोर्ड ही जाने। मगर एक बात यहां समझने वाली है कि महिला क्रिकेट और पुरुष क्रिकेट में इतना अंतर है, खासकर पाकिस्तान मामले में कि वो यदि खुदा न खास्ता जीतती भी है तो हार जाना तय है। जी हां, एशिया कप होना है और पाकिस्तानी टीम की हालत खराब है। इसके पहले पाकिस्तान महिला टीम ने तैयारियों के लिए पुरुष टीम के खिलाफ पूरे टी२० मुकाबले खेले। फातिमा सना की टीम ने लाहौर में अब्दुल कादिर क्रिकेट अकादमी के खिलाड़ियों के साथ मैच खेलकर दबाव में बेहतर पैâसले लेने की तैयारी की। पाकिस्तान १ सितंबर को थाईलैंड के खिलाफ अभियान शुरू करेगा, जबकि ५ सितंबर को भारत से भिड़ेगा। महिला एशिया कप २८ अगस्त से शुरू होने वाला है, लेकिन पाकिस्तान ने इस बड़े टूर्नामेंट से पहले अपनी तैयारियों को धार देने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया। टीम ने ट्रेनिंग वैंâप के दौरान पुरुष टीम के खिलाफ बाकायदा पूरे टी२० मुकाबले खेले। कप्तान फातिमा सना की टीम ने लाहौर की नेशनल क्रिकेट अकादमी में अब्दुल कादिर क्रिकेट अकादमी की पुरुष टीम के खिलाफ मुकाबले खेले, जिसमें किशोर खिलाड़ियों के साथ सीनियर खिलाड़ी भी थे।
हार के बाद तीखा प्रहार!..भारतीय पुरुष और महिला
हॉकी टीमों के वर्ल्ड कप से सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने के बाद पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने हॉकी मैनेजमेंट पर तीखा हमला बोला। पुरुष टीम अर्जेंटीना से ३-५ से हारी और महिला टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद बाहर हुई। श्रीजेश ने कोचिंग, तैयारी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए। श्रीजेश ने सवाल उठाया कि आखिर वर्ल्ड कप में नाकामी के बाद जवाबदेही किसकी तय होगी? टीमों के बाहर होने के बाद श्रीजेश ने एक्स पर लिखा- चिंता मत कीजिए… वर्ल्ड कप कोई मायने नहीं रखता। एशियन गेम्स आने वाले हैं। वहां एक मेडल जीत लीजिए और फिर एल ए २०२८ के सपने देखना शुरू कर दीजिए। शायद वर्ल्ड कप में जो कुछ गलत हुआ, उसे ढंकने के लिए इतना ही काफी है। श्रीजेश ने खासतौर पर महिला टीम की तैयारियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले महिला टीम के चीफ कोच छुट्टी पर थे। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने दिल लगाकर संघर्ष किया और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए पूछा कि आखिर जवाबदेही किसकी है? क्या कोई टीम अपनी तैयारियों के आखिरी दौर में चीफ कोच के दूर रहने के बावजूद अपना-अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती है?
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)
