हिंदू धर्मशास्त्र हर प्राणी मात्र में देव दर्शन का संदेश देते हैं। यह ईश्वर रूप प्रकृति की पूजा के जरिए सभी प्राणियों के लिए हित का श्रेष्ठ उपाय भी है। इसी कड़ी में गाय भी देव प्राणी के रूप में पूजनीय है। धार्मिक मान्यताओं में गाय में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। व्यावहारिक तौर से भी गाय से मिलने वाली हर चीज रोग व शोक का अंत करने वाली होती है। धर्मग्रंथों में भी सभी मनोरथ सिद्ध करने वाली और देवशक्तियों से पूर्ण कामधेनु गाय भी पूजनीय बताई गई है। यही वजह है कि पितृपक्ष के विशेष काल में गोपूजा मंगलदायी व समस्त सांसारिक इच्छाओं को शीघ्र पूरी करने वाली बताई गई है। अगर आप भी व्यस्त जीवन में देव पूजा के लंबे विधान न अपना पाएं तो पितृपक्ष में हर रोज गोपूजा ही नहीं सिर्फ विशेष मंत्र से गाय को स्पर्श करने के आसान उपाय द्वारा धन, वाहन, मकान जैसी जीवन से जुड़ी हर इच्छा को पूरी कर सकते हैं।
जानिए यह सरल विधि व मंत्र विशेष-
सुबह स्नान के बाद या श्राद्ध के लिए भोजन तैयार करने के बाद गाय पर गंगाजल छिडक़र गंध, अक्षत, फूल चढ़ाकर गाय के घी के दीप से नीचे लिखा मंत्र बोल पूजा करें –
ॐ माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभि:।
प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिं वधिष्ट नमो नम: स्वाहा।।
पूजा के बाद मंत्र विशेष से गोमाता को छुएं, जिसके शुभ प्रभाव से धन व यश सहित सारी मंगल कामना पूरी हो जाती है। इस मंत्र पूजा के बाद गोमाता को भोजन का ग्रास खिलाएं और परिक्रमा कर गो माता को छूकर नीचे लिखे मंत्र से कामनापूर्ति के लिए प्रार्थना करें-
ॐ सर्वदेवमये देवि लोकानां शुभनन्दिनि।
मातर्ममाभिषितं सफलं कुरु नन्दिनि।।
पितृपक्ष में यथासंभव गोपूजा दोपहर में भोजन बनने के बाद पहला ग्रास गाय को देकर करना बहुत ही शुभ मानी गई है।
– शीतल अवस्थी
