सना खान
एक छोटे से गांव में दो मित्र रहते थे। दोनों ने साथ पढ़ाई की, साथ सपने देखे और एक ही दिन शहर की ओर निकल पड़े। कुछ वर्षों बाद पहला मित्र बड़ी गाड़ी में गांव लौटा। महंगे कपड़े, चमकदार घड़ी और लोगों की भीड़ उसके साथ थी। गांव वाले उसकी सफलता के किस्से सुनाने लगे। दूसरा मित्र भी उसी दिन गांव आया, लेकिन साधारण कपड़ों में। उसके पास न कोई बड़ी गाड़ी थी और न ही कोई दिखावा। लोग उसके बारे में ज्यादा बात नहीं कर रहे थे। शाम को गांव के एक बुजुर्ग ने दोनों को अपने पास बुलाया। उन्होंने पहले मित्र से पूछा, ‘तुमने क्या कमाया?’ उसने गर्व से अपनी संपत्ति, कारोबार और आलीशान जीवन का वर्णन किया। फिर दूसरे मित्र से वही प्रश्न पूछा गया। उसने मुस्कुराकर कहा, ‘मैंने लोगों का विश्वास कमाया। जिनके साथ काम किया, वे आज भी मेरा सम्मान करते हैं। जिनकी मदद की, उनकी दुआएं मेरे साथ हैं।’ बुज़ुर्ग कुछ देर चुप रहे और फिर बोले, ‘धन कमाना बड़ी बात है, लेकिन चरित्र कमाना उससे भी बड़ी बात है।’ उस दिन गांव वालों को एक गहरा फलसफा समझ आया। दुनिया अक्सर चमक देखकर प्रभावित हो जाती है। बड़ी गाड़ियां, ऊंचे पद और महंगे सामान सफलता के प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन हर चमक सफलता नहीं होती। सच्ची सफलता वह है जो इंसान के जाने के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहे। जो सम्मान, विश्वास और अच्छे कर्मों के रूप में याद की जाए। फलसफा यही है कि सफलता की ऊंचाई से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पीछे खड़े मूल्यों की गहराई होती है। क्योंकि दौलत तिजोरी में रहती है, लेकिन अच्छाई लोगों के दिलों में।
हर चमक को लोग सफलता समझ लेते हैं,
हर अमीर को खुशकिस्मत समझ लेते हैं।
मगर जो दिलों में घर बना ले अपने किरदार से,
दुनिया से जाने के बाद भी लोग उसी को याद रखते हैं।
