मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स: गरमाता सियासी मैदान उसपर सीटों की खींचतान

पूर्वांचल पॉलिटिक्स: गरमाता सियासी मैदान उसपर सीटों की खींचतान

हिमांशु राज

उत्तर प्रदेश के आगामी २०२७ विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे के मुद्दे पर सपा और कांग्रेस के बीच खींचतान तेज होती जा रही है। कांग्रेस राज्य की कुल ४०३ सीटों में से १०० से १५० सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कांग्रेस को ७० से ८० सीटें देने का प्लान कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस उनसे १२० सीटें मांग सकती है।
अखिलेश यादव का अगला कदम स्पष्ट है। यादव ने सीट बंटवारे के लिए जीतने की क्षमता को मुख्य मापदंड तय किया है। उनका साफ कहना है कि जो जीत सकते हैं, उन्हें टिकट मिलेगा। यह स्टैंड २०२२ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए समझाया जा सकता है जो करीब २० सीटें था।
अखिलेश के मन में दो रणनीति है। पहली रणनीति में सपा अंदरूनी तौर पर कांग्रेस के लिए ६० से ८० सीटों की सूची तैयार कर रही है। दूसरी रणनीति में सपा उत्तर प्रदेश की सभी ४०३ सीटों पर अपने संभावित उम्मीदवारों की पहचान कर रही है। यदि कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी रहती है, तो अखिलेश यादव बैकअप प्लान को सक्रिय कर सकते हैं। लोकसभा चुनाव २०२४ में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिली बड़ी सफलता के बाद दोनों दल २०२७ का विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ने जा रहे हैं। २०२४ में यूपी की ८० में से ३७ सीटें सपा जीती, कांग्रेस ने ६ सीट जीतीं और बीजेपी ३३ सीट ही जीत पाई।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी अब किसी नए दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और कांग्रेस के साथ जो तालमेल है, वही २०२७ के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछड़ों का वोट सपा-कांग्रेस को मिला और बीजेपी से छिटका इसलिए सपा-कांग्रेस का फायदा हुआ। कांग्रेस को भी इस गठबंधन से फायदा होने की उम्मीद है। बिहार में कांग्रेस के लिए गठबंधन धर्म निभाना भारी पड़ा और पार्टी सिर्फ ६ सीट पर सिमट गई। इससे मिले सीख से यूपी में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन जारी रखने पर फोकस कर रही है। अंतिम समझौता लगभग ८० सीटों के आसपास होने की उम्मीद है। अखिलेश यादव बगावत रोकने के लिए चुनाव से ३ महीने पहले ही टिकट घोषित करने का मास्टरस्ट्रोक खेला है। सपा का लक्ष्य १०० सीटें जीतकर भाजपा को मात देना है। दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए इस गठबंधन को बहुत आवश्यक मान रहा है।

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