-मगर पीड़िता ने नहीं मानी हार
-मुजरिम को जेल भेजकर लिया दम
श्रीकिशोर शाही
उन्नाव कांड देश की राजनीति का एक ऐसा बदरंग दाग है, जिसका इतिहास जब भी सामने आएगा, सिर्फ थू-थू ही होगी। एकदम फिल्मी ड्रामा। आपने अक्सर हिंदी फिल्मों में देखा होगा कि अदालत जाते वक्त किसी महत्वपूर्ण गवाह की रोड एक्सीडेंट में मौत हो जाती है। जज साहब गवाह का इंतजार करते रह जाते हैं और गवाही के अभाव में केस खारिज हो जाता है। सेंगर मामले में भी एक नहीं, बल्कि कई फिल्मी सीन जैसी घटनाएं घटीं।
यूपी की राजधानी लखनऊ से सिर्फ ६६ किलोमीटर दूर घटित हुए इस जघन्य अपराध को सामने आने में १० महीने लग गए थे। मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़िता के पिता पर हमला करके उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई और फिर उन्हें ही जेल भेज दिया गया। जेल में टॉर्चर के कारण उनकी मौत हो गई। फिर जब पीड़िता ने सार्वजनिक तौर पर इसके खिलाफ मुहिम छेड़ी तब जाकर इस घटना का पता चला। मगर अपराधी यहीं नहीं रुके। एक दिन पीड़िता के पिता की मौत के एक अहम गवाह यूनुस की भी हत्या हो गई।
रीयल लाइफ का सीन बिल्कुल फिल्मी अंदाज में आगे बढ़ रहा था। अपराधियों ने पीड़िता की जान लेने की भी कोशिश की। २८ जुलाई २०१९ का दिन। पीड़िता एक कार में अपने परिवार संग रायबरेली जा रही थी। तभी बिना नंबर प्लेट वाले एक ट्रक ने उस कार को जोरदार टक्कर मार दीr। टक्कर इतनी भीषण थी कि हादसे में पीड़िता की दो चाचियों की मौत हो गई। इस दुर्घटना में कार में सवार पीड़िता और उसके वकील घायल हो गए। इस मामले पर सीधा शक सेंगर पर गया। सेंगर के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया। हालांकि, २०२१ में दिल्ली उच्च नयायलय ने इस मामले में सेंगर को यह कहते हुए आरोपमुक्त कर दिया कि दुर्घटना की साजिश रचने के उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है। माना जाता है कि इस रोड एक्सीडेंट की साजिश पीड़िता को परिवार समेत खत्म करने के लिए रची गई थी। मगर वो कहते हैं न कि ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’! तो पीड़िता सर्वाइव कर गई। मगर सेंगर वैंâप को सुकून न मिला। रेप पीड़िता को लगातार धमकियां दी जाती रहीं। मगर पीड़िता लड़ती रही और मीडिया ने भी साथ दिया। आखिरकार सेंगर के खिलाफ बलात्कार, अपहरण और आपराधिक धमकी के आरोपों के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सेंगर को गिरफ्तार किया गया। ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही २५ लाख रुपए का जुर्माना लगाया था।
(समाप्त)
