झारखंड में मूसलाधार बारिश के बाद कई इलाकों की बिजली चली गई तो रांची के जोन्हा क्षेत्र के ग्रामीण मोबाइल, चार्जर और एक्सटेंशन बोर्ड लेकर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। स्टेशन पर ट्रेन से ज्यादा फोन चार्ज होने लगे और प्लेटफॉर्म ने अनौपचारिक ऊर्जा मंत्रालय संभाल लिया।
सरकार गांव-गांव बिजली पहुंचाने के दावे करती रही, मगर बारिश ने दावे का प्लग खींच दिया। घर अंधेरे में थे, नेटवर्क डगमगा रहा था और मोबाइल की बैटरी लोकतंत्र की उम्मीदों की तरह दो प्रतिशत पर लाल निशान दिखा रही थी। तब जनता ने आत्मनिर्भरता दिखाई, जहां सॉकेट दिखा, वहीं लाइन लगा दी। अब रेलवे को घोषणा करनी चाहिए, ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें, राजधानी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म तीन पर आएगी और मोबाइल चार्जिंग प्लेटफॉर्म एक पर जारी है।’ स्थिति ऐसी रही कि लोग ट्रेन पकड़ने नहीं, करंट पकड़ने स्टेशन पहुंचे। जिनके फोन चार्ज हो गए, उन्होंने मौसम, बिजली विभाग और सरकार, तीनों को कॉल लगाने का प्रयास किया होगा; जवाब किसने दिया, यह अलग शोध है। कमाल हो गया… गांव को बिजली देने वाला तंत्र बारिश में बैठ गया, लेकिन रेलवे स्टेशन ने लोकतंत्र की बैटरी बचा ली। अगली बार टिकट खिड़की पर पूछिए, रांची का टिकट बाद में, पहले दो घंटे की चार्जिंग मिलेगी क्या?
