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प्रयागराज में चीनी का ‘मीठा संकट’: 60 से 68 रुपये किलो पहुंची कीमत, दावों के बीच सुलग रही महंगाई की आंच

राजेश सरकार / प्रयागराज

त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतें आसमान छू रही हैं। जहां सरकारी महकमा और जिला प्रशासन ‘पर्याप्त स्टॉक’ होने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं हकीकत यह है कि खुले बाजार में चीनी 60 से 68 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेची जा रही है।
दावे और हकीकत में भारी फासला
एक तरफ प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को अफवाह बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ फुटकर बाजारों में चीनी के दाम आम उपभोक्ताओं की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। अगर स्टॉक भरपूर है तो फिर कीमतें बेकाबू क्यों हैं? सट्टेबाजी, कृत्रिम किल्लत और कुछ बड़े व्यापारियों द्वारा त्योहारों के मौसम का फायदा उठाने की कोशिश ने इस ‘मीठे संकट’ को और बढ़ा दिया है।
चीनी के दाम अब घटेंगे या और बढ़ेंगे? उपभोक्ता हैरान, व्यापारी परेशान बाजार के जानकारों का कहना है कि आगामी रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और गणेशोत्सव के कारण मांग में भारी उछाल आया है। आपूर्ति श्रृंखला में आ रही रुकावटों और कम उत्पादन की आशंका ने कीमतों को और हवा दे दी है। आम उपभोक्ता जो कुछ महीने पहले तक 40 से 45 रुपये किलो चीनी खरीद रहा था, वह आज 68 रुपये तक देने को मजबूर है।
सरकार के कड़े निर्देश, लेकिन जमीन पर कब दिखेगा असर?
बढ़ती कीमतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और चीनी आयुक्त ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से ही पेराई सत्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बाजार में नई चीनी की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को भी मंजूरी दी है। लेकिन जब तक ये प्रशासनिक फैसले धरातल पर नहीं उतरते, तब तक प्रयागराज की जनता को इस कड़वी महंगाई का घूंट पीना ही पड़ेगा।
अफवाहबाजों और जमाखोरों की अब खैर नहीं!
उत्तर प्रदेश में चीनी संकट और बढ़ती कीमतों को लेकर मचे घमासान के बीच सरकार के दावों को धरातल पर उतारते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सोशल मीडिया पर चल रही चीनी की किल्लत की खबरों को पूरी तरह बकवास और अफवाह करार दिया है। डीएम ने साफ कहा कि जिले में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जनता को पैनिक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
कालाबाजारी करने वालों पर गिरेगी गाज!
बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रखने और कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले गिरोहों को चेतावनी देते हुए प्रशासन ने कड़े तेवर अपना लिए हैं। डीएम ने जिले के सभी थोक व्यापारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि वे भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर अपने मौजूदा स्टॉक की जानकारी तत्काल अपलोड करें। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
होगी औचक छापेमारी, लगेगा गैंगस्टर एक्ट!
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, व्यापारियों के गोदामों की औचक जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। अगर कोई भी व्यापारी चीनी की जमाखोरी या कालाबाजारी करते हुए पकड़ा गया तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
पैनिक न हों, खुले बाजार से खरीदें चीनी
डीएम ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान देकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। लोग आवश्यकता के अनुसार खुले बाजार से सामान्य रूप से चीनी खरीद सकते हैं। प्रशासन पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि त्योहारों या आम दिनों में आम जनता की जेब पर डाका न डाला जा सके।

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