मुख्यपृष्ठनए समाचारफडणवीस के गढ़ में ‘डिजिटल अंधेरा’!

फडणवीस के गढ़ में ‘डिजिटल अंधेरा’!

– ४१.५ प्रतिशत स्कूल इंटरनेट से दूर
-फिर भी जेन-जी को सपने दिखा रही सरकार

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर की बातें खूब हो रही हैं। लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक गढ़ नागपुर के स्कूलों की तस्वीर इन दावों को आईना दिखा रही है। जिले के ४१.५ प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा ही नहीं है और ३४.२ प्रतिशत स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यानी जिस नागपुर में भविष्य की पीढ़ी को तकनीक से जोड़ने के दावे किए जा रहे हैं, वहां बड़ी संख्या में बच्चे डिजिटल शिक्षा की बुनियादी सुविधाओं से ही दूर हैं।
यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब रविवार को नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘जेन-जी युवा’ कार्यक्रम के जरिए नई पीढ़ी और उसके भविष्य की बात की। एक ओर युवाओं के सामने तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल दुनिया के अवसरों की चर्चा हो रही थी, दूसरी ओर उसी नागपुर जिले की हजारों छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल में इंटरनेट और कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं। सवाल यही है कि जिस पीढ़ी को डिजिटल भविष्य का सपना दिखाया जा रहा है, उसे डिजिटल वर्तमान की बुनियादी सुविधा कौन देगा?
यू-डायस रिपोर्ट २०२५-२६ के आंकड़े नागपुर की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने रखते हैं। जिले के ४१.५ प्रतिशत स्कूल इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं। आज ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, ई-कंटेंट, शैक्षणिक ऐप और डिजिटल पाठ्यक्रम शिक्षा का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में स्कूल में इंटरनेट ही नहीं होगा तो डिजिटल शिक्षा का दावा आखिर किस आधार पर किया जा रहा है? स्थिति यहीं खत्म नहीं होती। ३४.२ प्रतिशत स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। यानी तीन में से लगभग एक स्कूल में विद्यार्थी कंप्यूटर के प्रत्यक्ष उपयोग से ही वंचित हैं। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

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