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मनपा में ठेकेदार राज पर भड़के कर्मचारी… मोटर-ग्रेडर ऑपरेटरों ने खोला मोर्चा

-आउटसोर्सिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरा आक्रोश

द्रुप्ति झा / मुंबई

मनपा प्रशासन द्वारा मोटर-ग्रेडर और भारी मशीनरी ऑपरेटरों के पदों पर आउटसोर्सिंग थोपने और निजीकरण को बढ़ावा देने की नीति के खिलाफ कर्मचारियों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। मनपा के मोटर-ग्रेडर ऑपरेटरों और कामगार यूनियनों ने पालिका प्रशासन की इस कामगार विरोधी नीति के खिलाफ आजाद मैदान और डिपो परिसरों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि प्रशासन अपने चहेते ठेकेदारों की जेबें भरने के लिए बीएमसी के कुशल और अनुभवी ऑपरेटरों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।
प्रदर्शनकारी ऑपरेटरों और श्रमिक संगठन के नेताओं ने प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पालिका के पास अपनी आधुनिक मशीनरी और क्षमतावान जनशक्ति मौजूद है, फिर भी करोड़ों रुपए का ठेका निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। आउटसोर्सिंग की आड़ में न केवल स्थायी पदों को समाप्त किया जा रहा है, बल्कि बरसों से सेवा दे रहे संविदा कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें
मोटर-ग्रेडर, भारी वाहनों और सफाई मशीनरी की आउटसोर्सिंग व निजी टेंडर प्रक्रिया को तत्काल रद्द किया जाए। मनपा के मैकेनिकल और टेक्निकल विभागों में वर्षों से खाली पड़े ऑपरेटर पदों पर नियमित भर्ती शुरू हो। अस्थायी ऑपरेटरों को स्थायी सेवा में समायोजित किया जाए और समान काम, समान वेतन’ का सिद्धांत लागू हो। जोखिम भरा काम करने वाले चालकों और ऑपरेटरों को व्यापक स्वास्थ्य बीमा और आधुनिक सुरक्षा किट दी जाए।

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