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एसटी की आर्थिक बदहाली का आंकड़ा आया सामने!

 -जुलाई में ‘लालपरी’ को १३८ करोड़ का घाटा…घाटे की सूची में नासिक विभाग सबसे ऊपर; ३१ में से २८ विभाग घाटे में

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र की जीवनरेखा कही जानेवाली राज्य परिवहन निगम (एसटी) की आर्थिक बदहाली का एक और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। जुलाई में एसटी महामंडल को १३८.६३ करोड़ रुपए का घाटा हुआ। राज्य के ३१ विभागों में से केवल तीन विभाग मुनाफे में रहे, जबकि २८ विभाग घाटे में चले गए। सबसे अधिक घाटा नासिक विभाग को हुआ। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब एसटी की आय बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को ‘नियंत्रण अधिकारी’ बनाकर विभिन्न विभागों में भेजा जा रहा है। परिवहन विभाग उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है। ऐसे में एसटी की लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कमाई से करीब १३९ करोड़ ज्यादा खर्च
जुलाई में एसटी को करीब ९५८.२३ करोड़ रुपए की आय हुई, जबकि खर्च १,०९६.८६ करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यानी एसटी की कमाई से करीब १३९ करोड़ रुपए अधिक खर्च हुआ। महीने के अंत में १३८.६३ करोड़ रुपए का घाटा दर्ज किया गया। सवाल यह है कि जब आय बढ़ाने के लिए अधिकारियों के दौरे, समीक्षा और कार्रवाई का सिलसिला जारी है तो फिर घाटा कम होने के बजाय इतना बड़ा कैसे हो गया?
अधिकारियों के दौरे, फिर भी घाटा बरकरार
एसटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महाप्रबंधक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को नियंत्रण अधिकारी नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों को विभिन्न विभागों में जाकर आय बढ़ाने के उपाय करने और कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, एसटी के भीतर चर्चा है कि इन दौरों में कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने के बजाय कार्रवाई और निलंबन पर अधिक जोर दिया जा रहा है। यदि कार्रवाई ही आय बढ़ाने का रास्ता होती तो जुलाई में एसटी का घाटा इतना बड़ा नहीं होता।
घाटे में नासिक सबसे आगे
घाटे की तस्वीर में नासिक सबसे ऊपर है। जुलाई में नासिक विभाग को करीब १३.४८ करोड़ रुपए का घाटा हुआ। इसके बाद कोल्हापुर १३.०७ करोड़, रत्नागिरी ९.३२ करोड़, सातारा ८.३२ करोड़ और सांगली ८.२३ करोड़ रुपए के घाटे में रहे। धाराशिव विभाग को करीब २७.४७ करोड़ रुपए की परिवहन आय हुई, लेकिन उसका खर्च ३१.८२ करोड़ रुपए तक पहुंच गया। परिणामस्वरूप विभाग को करीब ४.३५ करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा।

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