– करोड़ों की परियोजनाओं से निकल रहा मलबा
-एकीकृत सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का अता-पता नहीं
-आरटीआई में सिडको का चौंकाने वाला खुलासा
सामना संवाददाता / नई मुंबई
नवी मुंबई में विकास के नाम पर सड़कों, मेट्रो, फ्लाईओवर और इमारतों का जाल तेजी से पैâल रहा है, लेकिन इस विकास के साथ निकलने वाले हजारों टन निर्माण मलबे का आखिर होगा क्या? इस सवाल का जवाब प्रशासन के पास भी साफ नहीं है। आरटीआई से सामने आई जानकारी ने नई मुंबई के मलबा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक तरफ अवैध तरीके से मलबा फेंकने वालों पर कार्रवाई की जाती है, दूसरी तरफ नागरिकों और ठेकेदारों के लिए अधिकृत निपटान व्यवस्था ही पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है।
सजग नागरिक मंच ने सिडको और नई मुंबई महानगरपालिका से आरटीआई के जरिए अधिकृत मलबा निपटान नीति, डंपिंग साइट, नागरिकों के लिए सुविधा, प्रोसेसिंग प्लांट, अधिकृत परिवहन एजेंसियों, कार्रवाई और जुर्माने से संबंधित जानकारी मांगी थी। संगठन के मुताबिक, सिडको ने जवाब में कई महत्वपूर्ण जानकारियों को ‘उपलब्ध नहीं’ बताया।
आरटीआई आवेदक और सजग नागरिक मंच के सदस्य भीमराव सदराम जामखंडीकर ने इसके बाद प्रथम अपील दायर की। सुनवाई के दौरान सिडको अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि पूरे सिडको क्षेत्र के लिए कोई एकीकृत मलबा प्रबंधन व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग परियोजनाओं के विभाग अपने अनुबंधों में मलबा निपटान की शर्तें तय करते हैं और परियोजना के अनुसार, मलबे को निचले इलाकों में डालने का प्रावधान किया जाता है। यानी करोड़ों रुपए की विकास परियोजनाएं तो रफ्तार पकड़ रही हैं, लेकिन उनके मलबे का वैज्ञानिक और पारदर्शी निपटान अभी भी सवालों के घेरे में है।
हाई कोर्ट की फटकार के बाद भी व्यवस्था अधूरी!
वाहल क्षेत्र में अवैध मलबा डंपिंग को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में मामला पहुंच चुका है। इसके बाद जनवरी २०२४ में शहरी विकास विभाग ने सिडको के संयुक्त प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का दावा है कि जमीन पर एकीकृत व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।
