रामदिनेश यादव / मुंबई
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। कभी ४० रुपए किलो के आसपास मिलने वाली चीनी के दाम ७० से ८० रुपए किलो तक पहुंचने से आम लोगों का बजट बिगड़ गया है। चीनी से तैयार होने वाले खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ रहा है। लोगों की नाराजगी और सरकार की परेशानी के बीच अब चीनी के स्टॉक और वितरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों में ही करीब ४५ से ५० लाख टन चीनी के हिसाब को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ चीनी मिलों ने चीनी बेचने के लिए टेंडर जारी किए, लेकिन बाद में चीनी बेची ही नहीं गई। ऐसे में चीनी के उत्पादन, स्टॉक और वितरण को लेकर सरकारी आंकड़ों में कथित गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
मिलों ने टेंडर निकाला, लेकिन चीनी बेची नहीं
किसान स्वाभिमानी संगठन के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने इस पूरे मामले में ‘चीनी घोटाले’ की आशंका जताते हुए केंद्र सरकार की चीनी नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
शेट्टी ने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी मात्रा में चीनी आखिर गई कहां? यदि देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध था तो बाजार में चीनी की कीमतों में इतनी तेज वृद्धि वैâसे हुई? उन्होंने सरकार से उत्पादन से लेकर मिलों के स्टॉक और बाजार में बिक्री तक पूरे आंकड़ों का मिलान कराने की मांग की है।
चीनी मिलों ने टेंडर निकाला, लेकिन बेची नहीं चीनी
शेट्टी का आरोप है कि राज्य की कुछ चीनी मिलों ने चीनी की बिक्री के लिए टेंडर जारी किए, लेकिन बाद में चीनी बेची ही नहीं गई। इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर संदेह और गहरा गया है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं चीनी का स्टॉक रोककर बाजार में कृत्रिम कमी तो पैदा नहीं की गई? यदि ऐसा हुआ है तो बढ़ी हुई कीमतों का फायदा आखिर किसे मिल रहा है, इसकी जांच जरूरी है।
१० लाख टन चीनी आयात पर भी सवाल
केंद्र सरकार द्वारा १० लाख टन चीनी आयात करने के फैसले पर भी राजू शेट्टी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आयातित चीनी अक्टूबर के आस-पास भारत पहुंच सकती है। इसी अवधि में देश में नए पेराई सत्र की शुरुआत होने की संभावना है। ऐसे में घरेलू उत्पादन और आयातित चीनी एक साथ बाजार में आने पर कीमतों में गिरावट हो सकती है। शेट्टी का कहना है कि इसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है। यदि चीनी के दाम गिरते हैं तो किसानों को अपने उत्पादन का उचित मूल्य मिलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में सरकार को आयात के फैसले के पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए।
५० लाख टन चीनी आखिर गई कहां?
राजू शेट्टी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में चीनी की बढ़ती कीमतों और बाजार में उपलब्ध स्टॉक की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि देश में हर महीने करीब २२ लाख टन चीनी का कोटा जारी किया जाता है, जबकि सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में ४५ से ४८ लाख टन चीनी के स्टॉक और वितरण का हिसाब स्पष्ट नहीं है।
