कविता श्रीवास्तव
आज सुबह अखबार उठाया तो दो विरोधाभासी खबरों ने खूब अचंभित किया। एक चित्र में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संग हाथ मिलाकर मुस्कुराते हुए नजर आए। दूसरी ओर हवाई अड्डे पर रोते-बिलखते लोगों की आंखों में आंसू देख कर मन बहुत द्रवित हुआ। यह विरोधाभास देखकर मन विचलित भी हुआ। देश में पिछले पांच दिनों से हवाई यात्रियों का हाल बुरा है। इंडिगो की एक हजार से भी अधिक फ्लाइट्स रद्द हुई हैं। दस लाख से भी अधिक हवाई यात्रियों की फजीहत हुई है। डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय समय रहते स्थिति को संभालने में विफल रहे हैं। देश में नागरिक उड्डयन क्षेत्र की यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े विकसित हो रहे देश की व्यवस्थाएं आखिर कहां गईं? क्या यही हमारे विकास का चित्र है कि हजारों मुसाफिर एयरपोर्ट्स पर बिलख रहे हैं। इनमें बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और बीमारी से जूझ रहे लोग भी शामिल हैं। पिछले पांच दिनों में अनगिनत लोग एयरपोर्ट्स पर घंटों तक फंसे रहे। कोई इलाज के लिए जा रहा था। कोई अपने ही विवाह के लिए जा रहा था। कोई किसी की अंत्येष्टि में पहुंचना चाहता था। किसी का इंटरव्यू था। किसी की परीक्षा थी, पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने नियमों की सख्ती दिखाई। इंडिगो की उड़ानें थम गईं और सब फंस गए। एयरपोर्ट्स पर खाने-पीने, कपड़े, दवाइयों और रहने की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गईं। इंडिगो ने ‘सॉरी’ कह दिया। उसके पास पर्याप्त व्यवस्था नहीं थीं। आपातकालीन मेडिकल जरूरतें भी अपर्याप्त सिद्ध हुईं। दरअसल, इंडिगो ने नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) लागू करने में गंभीर चूक की है। यह नियम पायलटों की सुरक्षा और उनकी थकान को ध्यान में रखते हुए लागू हुआ था। लेकिन इंडिगो एयरलाइन की मनमानी के कारण उसका पूरा ऑपरेशन चरमरा गया। उसके प्रबंधन को ही इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। हालांकि, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने यात्रियों की होने वाली फजीहत की वैकल्पिक व्यवस्था किए बगैर अपने नियम को सख्ती से लागू करवाया। हंगामा मचने के बाद अब जाकर डीजीसीए ने कुछ नियमों में अस्थायी ढील दी है। यह राहत तब दी गई जब संकट चरम पर पहुंच गया। प्रभावित हवाई यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं देने में सरकार भी नाकाम रही है। हालांकि, डीजीसीए ने इंडिगो प्रबंधन को तलब किया है। घटना की जांच हो रही है। किंतु, यह फजीहत नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा तय किए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट के नए नियमों के दूसरे चरण को लागू करने पर उत्पन्न हुई। इंडिगो की गलत योजना के कारण पायलटों और क्रू की कमी पड़ी। इसीलिए उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। यात्रियों को भारी परेशानी हुई और एयरपोर्ट पर हंगामा हुआ। यह संकट एयरलाइन्स के कुप्रबंधन और क्षमता से अधिक उड़ानें संचालित करने की कोशिशों का नतीजा है। इसे संभालने में इसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की विफलता भी नजर आती है।
