अपना ध्यान खुद रखिए,
जमाना बहुत खराब है।
सद्भाव अब अपवाद बना,
स्वार्थ का हर ओर प्रभाव है।
दोस्त ही फरेबी निकले,
फिर कैसा ऐतबार है।
बातों से मुकर जाना अब,
लोगों का आम व्यवहार है।
आवाज़ ऊँची होने के दौर में,
कौन सुनता विचार है।
सच कहने वाले कम बचे,
हर चेहरा बस एक किरदार है।
अपना ध्यान खुद रखिए,
ज़माना बहुत खराब है।
अपनी रक्षा करना सीखो,
यही आज के हालात हैं।
मुनीष भाटिया
ऐरो सिटी,
मोहाली
