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वाइब्रेंट गुजरात का स्याह चेहरा … २०१७ से ठप पड़ा है मजदूर कल्याण बोर्ड!

-श्रमिकों के फंड में गंभीर कुप्रबंधन
– रु.२,२४३ करोड़ खाते में फंसे हैं
-कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
-संस्थान में ७२% पद हैं खाली
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
गुजरात में मजदूरों के कल्याण के लिए बना सिस्टम चरमरा गया है। इस बात का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी-वैâग) की एक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य का प्रमुख मजदूर कल्याण बोर्ड २०१७ से बिना पर्याप्त सदस्यों के काम कर रहा है और नियमित कर्मचारियों के ७२ फीसदी पद खाली पड़े हैं।
गुजरात विधानसभा में पेश किए गए इस ऑडिट ने गहरी प्रशासनिक विफलता को उजागर किया है। बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (बीओसीडब्ल्यू) वेलफेयर बोर्ड, जिसे कानूनन श्रमिकों और नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, पिछले पांच वर्षों से केवल एक सरकारी अफसर के भरोसे चल रहा है। इसके साथ ही, विशेषज्ञ परामर्श समिति, २०११ से ही पूरी तरह नदारद है। इस संस्थागत विफलता के कारण २००६ से अब तक वेलफेयर सेस के रूप में एकत्र किए गए ४,७८७.६ करोड़ रुपए में से २,२४३ करोड़ रुपए सरकारी खातों में फंसे और अनुपयोगी पड़े मिले।

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