कविता श्रीवास्तव
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का दरवाजा अब आधी रात को भी खुला रहेगा। इमरजेंसी में अब आधी रात को भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। इसकी पहल की है भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने। उन्होंने कहा है कि अगर किसी नागरिक को कानूनी इमरजेंसी की आवश्यकता पड़ती है या जांच एजेंसियों द्वारा अजीब समय पर गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है, तो वह व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा के लिए आधी रात को भी संवैधानिक अदालतों से सुनवाई की मांग कर सकेगा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही यह व्यवस्था अमल में आ जाएगी। देश की न्यायिक व्यवस्था में यह अभूतपूर्व एवं क्रांतिकारी कदम है। अदालतों को आम आदमी के लिए जितना सहज बनाया जाएगा और जितना उसके करीब लाया जाएगा, न्यायिक प्रणाली उतनी ही तेज रफ्तार पकड़ेगी। यह इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि आज भी अदालतों में अनगिनत मामले बरसों से लटके पड़े हैं। न्याय की आस में अनेक लोगों की उम्मीदें भी धूमिल हो चुकी हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘मेरा प्रयास है और रहेगा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को लोगों की अदालत बनाया जाए, जहां कानूनी इमरजेंसी में काम के घंटों के बाद भी किसी भी समय संपर्क किया जा सके।’ भारत के मुख्य न्यायाधीश की यह कोशिश यकीनन आम जनता के हित में क्रांतिकारी कदम है। भारत के प्रत्येक नागरिक को सही और उचित न्याय मिले, ऐसी व्यवस्था हमारे संविधान में है। किंतु न्याय में विलंब होना कई बार न्याय के महत्व को कम कर देता है। इसीलिए यह आवश्यक है कि सबको अदालतें भी २४ घंटे उपलब्ध हों और न्याय भी एक सुनिश्चित समायावधि में मिल जाए। इसी विषय को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि उनकी प्राथमिकताओं में से एक यह है कि कई अहम संवैधानिक मुद्दों से जुड़ी पेंडिंग याचिकाओं से निपटने के लिए जितनी हो सके उतनी संविधान बेंचें स्थापित की जाएं। ऐसा इसलिए ताकि न्याय तत्काल मिले और किसी को गंभीर नुकसान न हो। यह व्यवस्था ‘लोगों की अदालत’ की अवधारणा को बढ़ावा देगी, जहां किसी भी नागरिक को कानूनी आपातस्थिति में तुरंत राहत मिल सकती है, भले ही यह सामान्य कार्यावधि की सीमा से बाहर का समय ही क्यों न हो। इससे अदालतें कई गंभीर और तात्कालिक मामलों में जैसे कि जीवन-मरण, बाल सुरक्षा या संपत्ति के बड़े नुकसान के खतरे में तुरंत सुनवाई व कार्रवाई कर सकती हैं। आपातस्थिति में देर रात भी अदालत पहुंचा जा सके, यह निश्चित रूप से आम जनता को न्याय देने की सही मंशा व्यक्त करता है। देश में न्यायिक प्रक्रिया में निरंतर सुधार हो रहे हैं। हर बार नए चीफ जस्टिस के आने पर कोई न कोई बेहतरीन कदम उठाए ही जाते हैं। न्याय के लिए जनता का अदालत पर ही भरोसा है और इस भरोसे को आज के आधुनिक युग में जितनी गति मिलेगी, उतनी ही लोगों को सहूलियत भी होगी।
