सुनील ओसवाल / मुंबई
मुंबई से सिंधुदुर्ग को जोड़ने वाली बहुचर्चित सागरी ‘रो-रो’ सेवा शुरू होने के कुछ ही दिनों में ठप पड़ गई है। बड़े दावों और उम्मीदों के साथ लॉन्च की गई यह सेवा अब अनिश्चितकाल के लिए बंद है, जिससे सरकार की योजना और उसकी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
१ मार्च को बड़े उत्साह के साथ शुरू हुई इस सेवा को ‘कोस्टल कनेक्टिविटी’ का नया अध्याय बताया गया था। पहली फेरी में यात्रियों और वाहनों की अच्छी-खासी संख्या देखने को मिली थी, वहीं विजयदुर्ग बंदरगाह पर इसका भव्य स्वागत भी किया गया था। माना जा रहा था कि इस सेवा से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मुंबई में काम करने वाले लोगों के लिए अपने गृह जिले तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा। हालांकि, कुछ ही फेरे के बाद यह सेवा अचानक ठप पड़ गई। सूत्रों के अनुसार, फेरी के चार में से तीन इंजनों में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे संचालन पर सीधा असर पड़ा। इसके अलावा, शुरुआती उत्साह के बाद यात्रियों की संख्या में गिरावट भी दर्ज की गई, जिससे आर्थिक गणित बिगड़ गया।
विजयदुर्ग, जिसे प्राकृतिक रूप से सुरक्षित बंदरगाह माना जाता है, ऐतिहासिक रूप से जल परिवहन का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष १९८५ के बाद बंद हुई इस व्यवस्था को दोबारा शुरू करने के प्रयास के रूप में ‘रो-रो’ सेवा को देखा जा रहा था। इससे स्थानीय पर्यटन, व्यापार और रोजगार को गति मिलने की उम्मीद थी। मगर अब यह महत्वाकांक्षी योजना सवालों के घेरे में आ गई है। क्या तकनीकी खामियों की पहले से जांच नहीं की गई थी? क्या यात्रियों की संख्या का आकलन गलत साबित हुआ? या फिर यह परियोजना केवल दिखावे तक ही सीमित रह गई?
फिलहाल, प्रशासन की ओर से सेवा दोबारा शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में ‘रो-रो’ सेवा, जो समुद्री पर्यटन की नई उम्मीद मानी जा रही थी, अब अधूरी योजना और कमजोर क्रियान्वयन की मिसाल बनती नजर आ रही है।
