राजन पारकर / नागपुर
आठ दिनों की डेडलाइन पर विधानसभा में कल सरकार ने ऐसा आदेश निकाला कि सुनकर जनता ने अपना ई-वाहन नहीं, अपने धैर्य को चार्जिंग पर लगा दिया। अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर ने आदेश दिया कि आठ दिनों में ई-वाहनों की टोल-माफी लागू करो। सरकार को लगा कि जनता प्रसन्न होगी। जनता को लगा कि सरकार सपने बेच रही है। टोल वालों को लगा कि यह सब नियम पुस्तिका में होगा, बूथ पर नहीं। टोल-माफी: सरकार कहती है लागू, जनता कहती है झूठ और सिस्टम कहता है, रीस्टार्ट करिए।
सरकार का दावा कि २२ अगस्त से नीति लागू है। जनता की प्रतिक्रिया- यदि नीति लागू है, तो टोल क्यों काट रहे हो भाई? सरकारी उत्तर-‘र्घ्ण् मेनटेनेंस में है, इAएऊaु इंटीग्रेशन में है, बैंक सिस्टम अपग्रेडिंग में है। जनता और आप हमेशा बहाना मोड में हैं। सरकार की मनस्थिति-कागज पर लागू कर दिया, अब जनता खुद समझ ले। टोल बूथ की मनस्थिति-नीति अपनी जगह, रसीद अपनी जगह। चार्जिंग स्टेशन: सरकारी प्लानिंग का सबसे बड़ा कॉमेडी शो।
अध्यक्ष ने पूछा- चार्जिंग स्टेशन कहां हैं? सरकारी विभाग ने उत्तर दिया ‘महाराज, वे पवित्र आत्माएं हैं, दिखती नहीं, पर अस्तित्व उनका महान है। मौजूदा स्टेशन एक गाड़ी को ८ घंटे में चार्ज करता है। सरकार दावा करती है, हम फास्ट चार्जिंग लाएंगे। जनता कहती है पहले चार्जिंग लाओ, फास्ट बाद में देख लेंगे। अगर वर्तमान स्पीड से काम चला, तो ई-वाहन चार्ज होने में जितना समय लेगा, उतने में सरकार दो चुनाव, तीन गठबंधन और चार प्रेस कॉन्प्रâेंस कर लेगी।
मंत्री भुसे का सरकारी ‘ज्ञान योग’
मंत्री भुसे ने गंभीर स्वर में कहा कि सब प्रक्रिया में है। जनता ‘सर, कब पूरी होगी? सरकार जैसे ही ब्रह्मांड की सभी ग्रह-नक्षत्र इAएऊaु लाइन में आ जाएंगे। जनता को अब यह समझ आ चुका है कि सरकार के लिए प्रक्रिया में मतलब भूल जाओ, अभी कुछ होने वाला नहीं। जनता की तीखी प्रतिक्रिया: ई-वाहन चला रहे हैं या आश्रम जा रहे हैं? जनता कहती है-हमने ई-वाहन लिया पर्यावरण बचाने के लिए और सरकार ने हमें भटका दिया चार्जिंग स्टेशन खोजो यात्रा में।
