मुख्यपृष्ठस्तंभखाड़ी जंग ने ईरान को बना डाला महाबली

खाड़ी जंग ने ईरान को बना डाला महाबली

खुफिया रिपोर्ट से चौधरी अमेरिका की नींद उड़ी

संतोषी रावत

खेल पूरी तरह पलट चुका है! जिस ईरान को दबाने, झुकाने और पाबंदियों के जाल में बांधने की बिसात बिछाई जा रही थी, उसने शतरंज की बाजी ही पलट दी है। जंग की आग से झुलसकर कमजोर होने के बजाय, ईरान एक महाबली बनकर उभरा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के गलियारों में इस वक्त सन्नाटा और खौफ पसरा है, क्योंकि वॉशिंगटन की बंद फाइलों से जो सच बाहर आया है, उसने सुपरपावर के होश उड़ा दिए हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि ईरान अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और रणनीतिक रूप से मजबूत हो चुका है।
इस पूरे ड्रामे के केंद्र में हैं दुनिया के दो सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब।
सुपरपावर की नींद उड़ाने वाला ‘स्ट्रैटेजिक वेपन’
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के हाथ अब परमाणु बम से भी ज्यादा खतरनाक और अचूक हथियार लग गया है वैश्विक व्यापार की नब्ज दबाने की ताकत।
ईरान जब चाहे, जैसे चाहे, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को पूरी तरह चोक कर सकता है यानी बंद कर सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया संघर्षों ने ईरान को तबाह नहीं किया, बल्कि उसे ऐसी सैन्य और कूटनीतिक क्षमताएं दे दी हैं, जिससे वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला सकता है।
तबाही का डबल लॉक होर्मुज और हूती का जाल
अगर अमेरिका के साथ जारी परमाणु समझौता वार्ता विफल होती है, तो ईरान सिर्फ एक मोर्चा नहीं खोलेगा। वह एक साथ दो तरफ से वार करने की स्थिति में है। पहला है होर्मुज स्ट्रेट पर सीधा नियंत्रण। जहां से दुनिया के तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान यहां सीधे तौर पर जहाजों का रास्ता रोक सकता है।
दूसरा यमन के हूती विद्रोही। ईरान अपने इस सबसे वफादार मोहरे के जरिए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी कोहराम मचा सकता है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर ये दोनों समुद्री रास्ते एक साथ बंद हो गए, तो वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो जाएगी, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार थम जाएगा और ऊर्जा बाजारों में ऐसा हाहाकार मचेगा, जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी।
कूटनीति के मंच पर शह और मात
यह सनसनीखेज चेतावनी ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब एक तरफ परमाणु समझौते को लेकर कूटनीतिक टेबल सजी हुई है और दूसरी तरफ युद्ध की धमकियां दी जा रही थीं, लेकिन अब पासा पलट चुका है। जो ईरान कल तक रक्षात्मक मुद्रा में था, आज वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की चाबी हाथ में लेकर खड़ा है।
अब देखना यह है कि खुद को दुनिया का चौधरी समझने वाला अमेरिका ईरान के इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ का क्या जवाब देता है, क्योंकि इस बार जंग सिर्फ सरहदों पर नहीं, बल्कि दुनिया के वजूद और व्यापार पर है!

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