अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध और उससे बढ़ी पेट्रोल की कीमतों ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा युद्ध को हार का प्रमुख कारण बताए जाने के बाद ट्रंप ने भी माना कि उनकी बात काफी हद तक सही है। हालांकि, उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के अपने पैâसले का बचाव किया।
तीन नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। रिपब्लिकन पार्टी को अपने कई परंपरागत गढ़ों में भी पराजय का सामना करना पड़ा।
चुनावी हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की हार का मुख्य कारण ईरान युद्ध है। उन्होंने बताया कि २०२४ में ट्रंप का समर्थन करने वाले अनेक मतदाता अब युद्ध, महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत से नाराज हैं।
वेंस की टिप्पणी पर पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने स्वीकार किया कि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं और इससे चुनाव में नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि दोबारा वही परिस्थितियां सामने आतीं, तो वह फिर यही पैâसला लेते।
अमेरिका और इजरायल ने फरवरी २०२६ में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल आया और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर र्इंधन की बढ़ती लागत का दबाव पड़ा।
चुनावी परिणामों ने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति और उसके घरेलू आर्थिक प्रभावों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। वेंस ने युद्ध समाप्त करने, महंगाई पर ध्यान देने और इजरायल के साथ अमेरिकी संबंधों की समीक्षा करने की जरूरत भी बताई है।
दिलचस्प स्थिति यह है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों चुनावी नुकसान में ईरान युद्ध की भूमिका स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन युद्ध शुरू करने के पैâसले पर उनके सार्वजनिक आकलन में अंतर दिखाई दे रहा है।
