-दिल्ली को पछाड़कर प्रदूषण में अव्वल हुई मुंबई
-जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर मायानगरी
सामना संवाददाता / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की हवा अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जिस मुंबई को समुद्री हवाओं के कारण अपेक्षाकृत साफ हवा वाला शहर माना जाता था, वही अब प्रदूषण के मामले में देश में सबसे आगे पहुंच गई है। वैश्विक वायु गुणवत्ता संस्था आईक्यूएयर ने मुंबई को भारत का सबसे प्रदूषित और दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बताया है। मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) १५२ दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में इस समय जमीन के नजदीक बनने वाली ओजोन गैस प्रदूषण का प्रमुख कारण है। वाहनों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक तेज धूप में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे ओजोन बनती है। अक्टूबर में असामान्य गर्मी और हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषक वातावरण में जमा हो रहे हैं। शहर के हर इलाके में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है। देवनार और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।
विकास के नाम पर धूल
मुंबई में लगातार चल रहे निर्माण और पुनर्विकास कार्य, सड़कों की धूल, वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और खुले में कचरा जलाना वायु प्रदूषण के बड़े स्रोत हैं। देवनार जैसे इलाकों में कचरा और प्लास्टिक जलाने से निकलने वाला धुआं आसपास की आबादी के लिए खतरा बनता है।
कचरा जलानेवालों पर कार्रवाई नहीं
बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने प्रदूषण के हॉटस्पॉट पहचानने के लिए २६ वार्डों में अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन सवाल यह है कि प्रदूषण के स्रोतों पर ठोस कार्रवाई कब होगी। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर रोक और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई कहीं नजर नहीं आती है।
सांस की बीमारी का बढ़ता खतरा
प्रदूषित हवा से आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी और दमा जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा खतरनाक साबित हो सकती है।
