-महाराष्ट्र में ५ महीने में बढ़े ३२ लाख मतदाता
-विपक्ष का जोरदार प्रहार
सामना संवाददाता / मुंबई
लोकतंत्र का चीरहरण लगातार जारी है और चुनाव आयोग धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आ रहा है। इसका उदाहरण महाराष्ट्र में साफ तौर पर दिखाई पड़ा है, जहां मात्र पांच महीनों में ३२ लाख मतदाता बढ़े हैं। कुल मिलाकर केंद्र का ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का नारा सिर्फ दिखावा है। इस तरह का जोरदार प्रहार विपक्षी दल कांग्रेस की सांसद वर्षा गायकवाड़ ने शीत सत्र में केंद्र सरकार पर किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों पर चुनाव आयोग की चुप्पी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे देश की चुनाव प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।
संसद में चल रहे शीत सत्र में वोट चोरी पर बोलते हुए सांसद वर्षा गायकवाड़ ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था विश्व में सर्वोत्तम मानी जाती है और इस प्रक्रिया में चुनावों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से कराना चुनाव आयोग का कर्तव्य है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश में चुनाव जिस तरीके से कराए जा रहे हैं, उसे देखकर जनता का चुनाव आयोग पर से विश्वास तेजी से घटता जा रहा है। वोट चोरी खुलेआम हो रही है, पर चुनाव आयोग महाभारत के धृतराष्ट्र की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा है। सांसद गायकवाड़ ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में हो रही व्यापक वोट चोरी का सबूतों सहित भंडाफोड़ किया है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और घोटाले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का नारा देती है, लेकिन बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव एक साथ नहीं करा पाई। यदि ये चुनाव एक साथ होते, तो नतीजे बिल्कुल अलग होते। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर प्रक्रिया चलाई गई और फिर १२ राज्यों में इसे लागू करने की घोषणा की गई, लेकिन महाराष्ट्र को इसमें जानबूझकर शामिल नहीं किया गया। चुनाव प्रक्रिया अब मजाक का विषय बन गई है।
सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कोरोना संकट, नोटबंदी और विमानन क्षेत्र में पैदा हो रहे खतरों को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने जानबूझकर उनकी बातों को अनसुना किया और देश को उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।
