पुतिन के दिल्ली दौरे से अमेरिका-यूरोप में खलबली
तेल का निर्यात रोकने के लिए पश्चिमी देश करेंगे
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
रूसी तेल व्यापार के खिलाफ सबसे बड़े कदम उठाने की तैयारी चल रही है। जी-७ देश और यूरोपीय संघ मिलकर रूसी कच्चे तेल के लिए समुद्री सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए समंदर का रास्ता रोकने पर विचार चल रहा है। यह एक ऐसा कदम होगा, जो पश्चिम के उन जहाजों और बीमा कंपनियों का गला घोंट देगी, जो अभी भी रूसी कच्चे तेल के निर्यात में मदद कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट में छह सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है। इस प्रतिबंध से मौजूदा प्राइस लिमिट सिस्टम समाप्त हो जाएगा और रूस द्वारा बड़े पैमाने पर पश्चिमी स्वामित्व वाले टैंकर्स के माध्यम से किए जाने वाले प्रॉफिटेबल समुद्री बिजनेस पर बड़ा अटैक होगा। इनमें से ग्रीस, साइप्रस और माल्टा जैसे यूरोपीय संघ की समुद्री शक्तियां शामिल हैं।
बता दें कि रूस अपने एक तिहाई से ज्यादा तेल की आपूर्ति पश्चिमी जहाजों और सेवाओं के जरिए करता है, जिसमें ज्यादातर हिंदुस्थान और चीन को सप्लाई किया जाता है।
रूस खोज रहा विकल्प
रिपोर्ट का दावा है कि तेल के प्राइस लिमिट से बचने के लिए रूस ने अपना अधिकांश कच्चा तेल अपने निजी टैंकरों से एशिया भेजा, जिनमें से कई पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं और जो पश्चिमी बीमा के बिना चलते हैं।
आखिरी फैसला ट्रंप का
जी-७ बैठकों में ब्रिटिश और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा वार्ता को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, कोई भी अंतिम अमेरिकी रुख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा चुनी गई रणनीति पर निर्भर करेगा, क्योंकि वह यूक्रेन-रूस शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहा है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो समुद्री सेवाओं पर प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध के बाद से जी-७ और यूरोपीय संघ द्वारा रूसी तेल पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध लाने की सबसे करीबी कार्रवाई होगी।
