-पीएम के जन्मदिन पर नमो नेत्र संजीवनी का शोर-शराबा
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुशामद की होड़ में महायुति सरकार ने जनता को मोहरा बनाकर ‘नमो नेत्र संजीवनी अभियान’ नाम की नौटंकी शुरू की है। इस दिखावेवाले मिशन का मकसद स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि राजनीति चमकाना है। मोदी के जन्मदिन पर शोर-शराबे के बीच इस अभियान की शुरुआत की गई और इसे गांधी जयंती तक चलाने का एलान हुआ है। सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि मुफ्त नेत्र जांच और ऑपरेशन वैंâप से १० लाख से ज्यादा नागरिकों को लाभ मिलेगा, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ आंकड़ों का खेल होगा। असल में यह पूरा उपक्रम जनता की आंखों की रोशनी बढ़ाने के बजाय महायुति की राजनीतिक चमक बढ़ाने की साजिश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर १७ सितंबर से पूरे महाराष्ट्र में ‘नमो नेत्र संजीवनी आरोग्य अभियान’ शुरू होगा, जो महात्मा गांधी जयंती, दो अक्टूबर तक चलेगा। इस अभियान में १० लाख से अधिक नागरिकों को मुफ्त नेत्र जांच, शल्य चिकित्सा और औषधि उपचार का लाभ मिलेगा। मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद मरीजों को मुफ्त चश्मे दिए जाएंगे और ग्लूकोमा सहित अन्य नेत्र रोगों का निदान व उपचार नि:शुल्क किया जाएगा। राज्य के सभी ३६ जिलों में तहसील और गांव स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे और जिन मरीजों को ऑपरेशन की आवश्यकता होगी, उन्हें जिला अस्पतालों और संबद्ध संस्थानों में भेजकर पूरी तरह मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री सहायता निधि और धर्मार्थ अस्पताल सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक ने जरूरतमंद नागरिकों से इस शिविर का लाभ उठाने की अपील की है।
योजनाओं को बना देते हैं सिर्फ प्रचार का साधन
नेत्र जांच और शल्यक्रिया का हवाला देकर सरकार गरीबों और ग्रामीणों को लुभाने का दावा कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। पहले भी ऐसे तमाम स्वास्थ्य शिविरों के आंकड़े कागजों पर तो चमकते हैं मगर वास्तव में लाभार्थियों तक सुविधा नहीं पहुंच पाती। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, डॉक्टरों की कमी, उपकरणों की उपलब्धता और आयोजन की निगरानी का अभाव इस तरह की योजनाओं को सिर्फ प्रचार का साधन बना देता है। लोगों का कहना है कि इस बार भी यही होनेवाला है नेत्र संजीवनी के नाम पर महायुति अपने राजनीतिक चश्मे से वोटबैंक को साधने की तैयारी कर रही है।
स्वास्थ्य को ढाल बनाकर वाहवाही लूटना मकसद
जनता को स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय इस पूरे अभियान को राजनीतिक स्टंट में बदल दिया गया है। नेत्र जांच और मुफ्त चश्मों की आड़ में सरकार प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सिर्फ राजनीति चमकाने में जुटी है। गरीब और वंचित नागरिकों के स्वास्थ्य को ढाल बनाकर सत्ता पक्ष वाहवाही लूटना चाहता है। असलियत में यह जनता की आंखों पर पट्टी बांधकर उसे गुमराह करने की सोची-समझी चाल है, जिसमें इलाज से ज्यादा प्रचार की रोशनी पैâलाई जा रही है।
