उमा सिंह
अरे वाह सम्राट जी, ई तो गजबे कर दिए..॰, बिहार में अपराध खत्म करने का ऐसा नायाब तरीका निकाला है कि अब अपराधी भी कन्फ्यूज हो जाएंगे कि आखिर करें तो करें क्या? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दावा है कि बिहार में कोई अपराध नहीं है। हां, क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं! यानी अंग्रेजी में गड़बड़ हो जाए तो चलेगा, हिंदी में सब चकाचक रहना चाहिए!
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने फरमाया कि बिहार में अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। अब मुख्यमंत्री जी को कौन समझाए कि क्राइम और अपराध में उतना ही फर्क है जितना समोसे और आलू में। नाम बदल देने से भीतर का मसाला थोड़े ही न बदल जाता है, लेकिन सरकार के शब्दकोश में शायद अपराध का पन्ना ही फाड़ दिया गया है। अब बिहार की पुलिस भी बड़ी दुविधा में होगी। कोई गोली चला दे, हत्या कर दे, लूट मचा दे तो एफआईआर में क्या लिखे? क्राइम लिखे या अपराध? कहीं हिंदी में लिख दिया तो सरकार के दावे की तौहीन न हो जाए। उधर, तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर चुटकी लेते हुए सवाल दाग दिया कि मंच पर बैठे आईएएस-आईपीएस अधिकारी खुद को सम्मानित समझ रहे हैं या अपमानित?
वैसे सम्राट जी, जनता को अंग्रेजी-हिंदी की क्लास नहीं चाहिए। उसे सुरक्षित सड़कें, बेखौफ जिंदगी और अपराधियों पर कार्रवाई चाहिए। शब्दों की बाजीगरी से कानून-व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती। अब तो बिहार में नया सरकारी बोर्ड लगना चाहिए, `सावधान! यहां क्राइम करने की छूट है, अपराध करने की मनाही!’
