-मुंबईकर चाहते हैं मोदी का इस्तीफा
सामना संवाददाता / मुंबई
आज सितंबर की सत्रह तारीख है। पीएम नरेंद्र मोदी के लिए इस बार सितंबर की यह ‘सतरा’ तारीख ‘खतरा’ लेकर आई है। असल में मामला ७५ साल के पार होने का है। मोदी आज ७५ साल के पार हो गए और भाजपा में यह पड़ाव रिटायरमेंट का होता है। वैसे भी हालिया क्रियाकलापों से मोदी की लोकप्रियता में गिरावट आई है और ऐसे में मुंबईकर उनका इस्तीफा चाहते हैं।
बता दें कि पहलगाम कांड के बावजूद आतंकी देश पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की अनुमति देने और वोटचोरी जैसे मुद्दों से ‘बेहाल’ मोदी के लिए इस बार सितंबर की यह ‘सतरा’ तारीख वाकई खतरा बनकर आई है।
हर रोज महंगाई बढ़ रही है
गृहिणी शकुंतला चौबे कहती हैं कि हर रोज महंगाई बढ़ रही है। गैस सिलेंडर हो या सब्जी किसी को राहत नहीं है। दस सालों में मोदी सरकार ने महंगाई को कम करने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ऐसे में मोदी जी को इस्तीफा देना चाहिए। इसी तरह छात्र हर्ष यादव का कहना है कि युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। सिर्फ जुमलेबाजी से देश नहीं चलेगा। हमें नए नेतृत्व की जरूरत है।
मार्गदर्शक मंडल कर रहा है मोदी का इंतजार!
मोदी आज ७५ साल के हो गए। ऐसे में भाजपा की परंपरा के अनुसार, उन्हें रिटायर होकर मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो जाना चाहिए। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संघ संचालित भाजपा में अब तक एक ‘नियम’ चला आ रहा है कि ७५ पार का कोई नेता किसी अहम पद पर काबिज नहीं रहे। पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसका इशारा भी किया था। लेकिन संघ और पार्टी में मोदी के कद को देखते हुए सभी यही मानकर चल रहे थे कि इस बार मोदी के साथ ही संघ व भाजपा का ‘७५ पार, हो रिटायर’ वाला नियम भी टूट सकता है।
लेकिन वोटचोरी के घर-घर में घर कर चुके मुद्दे से पीएम पद पर बने रहने का नैतिक हक और आधार खो चुके ‘कमजोर’ मोदी की बची- खुची, धराशाई होती छवि को ‘आतंकी पाकिस्तान के साथ मैच खेलने’ के मुद्दे ने मटियामेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रिक्शाचालक विनोद दुबे का कहना है कि मोदी जी ने १५ लाख से लेकर अच्छे दिन तक बहुत वादे किए थे। अब जनता पूछ रही है कि वो वादे कहां चले गए? विनय मिश्रा कहते हैं कि अबकी बार जनता का मूड साफ है। ७५ के पार का मतलब अब रिटायरमेंट का समय आ गया है। परेल के रोहित पवार का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को रिटायरमेंट ले लेना चाहिए। आरएसएस के नियमों के मुताबिक, यह सही भी है। अगर वह ऐसा नही करते है तो वह नियम तोड़ने वाले बन जाएंगे और अपने ही लोगों के बीच अपनी इज्जत खो देंगे। कांदिवली के चंदन मिश्रा का कहना है कि आईएस, आईपीएस व अन्य अधिकारियों को ६० वर्षो में रिटायरमेंट लेना पड़ता है। हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी ६२ व ६५ वर्ष पूरे होने पर रिटायरमेंट लेना पड़ता है तो प्रधानमंत्री के लिए भी कोई नियम होना चाहिए। वैसे मोदी जी समझदार है, वह अपने जन्मदिन के बाद इस्तीफा जरूर दे देंगे। गोरेगांव के राजदीप शुक्ला का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा पार्टी व आरएसएस के नियमों का सम्मान करते हुए रिटायरमेंट ले लेना चाहिए। क्योंकि उनके इस्तीफे के बाद पीएम का नया चेहरा सामने आएगा जो देश के भविष्य के लिए जरूरी है। अब देश युवा प्रधानमंत्री चाहता है।
