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नन्हे हाथों ने थामा प्रकृति का साथ…’हरित क्रांति’ की ओर बढ़े वर्तमान पीढ़ी के कदम

राजेश सरकार / प्रयागराज

बदलते दौर के साथ आज की नई पीढ़ी सिर्फ डिजिटल तकनीक में ही आगे नहीं है, बल्कि धरती को बचाने की मुहिम में भी सबसे आगे खड़ी नजर आ रही है। प्रतापगढ़ जिले के बड़का तुलापुर के साईं उर्फ बड़े मुंशी के नाती-पोतों मदन सिंह उर्फ छोटे मुंशी के लड़के अर्क सिंह, इ. दिनकर सिंह के बेटे आरुष सिंह व विवेक सिंह की बेटी अन्नया सिंह आदि स्थानीय बच्चों के एक समूह द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर किया गया एक अनूठा प्रयास सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक चर्चा का विषय बना हुआ है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कैसे खेल-कूद की उम्र में बच्चे मिट्टी और कुदाल लेकर एक नन्हे पौधे को रोप रहे हैं। कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और प्रदूषण के इस दौर में, बच्चों का मिट्टी से जुड़ना और पर्यावरण के प्रति ऐसा लगाव देखना एक सुखद अहसास कराता है। यह दृश्य साफ तौर पर दर्शाता है कि आज की पीढ़ी में ‘हरित क्रांति’ को लेकर एक नई चेतना और झुकाव पैदा हो रहा है। किताबों से निकलकर जमीन पर उतरी जागरूकता विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण शिक्षा अब केवल स्कूली किताबों और भाषणों तक सीमित नहीं रह गई है। बच्चे अब खुद आगे आकर पौधरोपण कर रहे हैं और उनकी देखभाल का जिम्मा भी उठा रहे हैं। इस अभियान में शामिल बच्चों ने बताया कि वे अपने घरों और आस-पास की खाली जमीनों पर इसी तरह पौधे लगाकर उन्हें एक बड़ा पेड़ बनते देखना चाहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और मौसम चक्र में बदलाव जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में इन बच्चों का यह छोटा सा कदम भविष्य के लिए एक बड़ी उम्मीद जगाता है। यदि हर परिवार अपने बच्चों को बचपन से ही प्रकृति से प्यार करना और पेड़ों की रक्षा करना सिखाए, तो आने वाला कल पूरी तरह सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त हो सकता है। इन नन्हे पर्यावरणविदों का यह प्रयास समाज के हर वर्ग के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

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