मुख्यपृष्ठस्तंभपेड़ों को मिट्टी चाहिए...सीमेंट और कंक्रीट नहीं!

पेड़ों को मिट्टी चाहिए…सीमेंट और कंक्रीट नहीं!

 ई राज

मानसून की फुहारें जहां मुंबई, ठाणे और नई मुंबई को भीषण गर्मी से राहत देती हैं, वहीं पिछले कुछ समय से ये बारिश अपने साथ एक डरावना मंजर भी ला रही है। हाल के दिनों में इन तीनों क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में पेड़ों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। दुखद बात यह है कि इन हादसों में कई मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जो पेड़ सदियों से हमें ऑक्सीजन और जीवन देकर हमारे ‘प्राणदाता’ बने हुए थे, आज वे अचानक ‘मौत’ क्यों बांटने लगे हैं? इस त्रासदी की जड़ें प्रकृति में नहीं, बल्कि हमारे अनियोजित शहरीकरण में छिपी हैं।
क्यों कमजोर हो रही हैं पेड़ों की जड़ें?
जड़ों का कंक्रीटीकरण: सड़कों और फुटपाथों को चमकाने के चक्कर में पेड़ों के तनों के बिल्कुल पास तक कंक्रीट और डामर बिछा दिया जाता है। उदाहरण के लिए, हाल ही में एक ६० साल पुराना पीपल का पेड़ इसी लापरवाही का शिकार हुआ। पानी और हवा की कमी: कंक्रीट की मोटी परत के कारण बारिश का पानी और जरूरी हवा पेड़ों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाती। इसके चलते जमीन के अंदर ही जड़ें सड़ने और कमजोर होने लगती हैं। सर्विस चैनलों की अंधाधुंध खुदाई: केबल, गैस पाइपलाइन और सीवर लाइनों के लिए ठेकेदारों द्वारा बिना सोचे-समझे की जानेवाली खुदाई पेड़ों की मुख्य जड़ों को काट देती है, जिससे उनका संतुलन बिगड़ जाता है।
बचाव के उपाय और सुझाव
यदि हमें अपने शहरों को हरा-भरा भी रखना है और सुरक्षित भी, तो तुरंत कड़े कदम उठाने होंगे।
कंक्रीट से मुक्ति: पेड़ों के आस-पास कम से कम एक निश्चित दायरा पूरी तरह कंक्रीटमुक्त होना चाहिए, ताकि जड़ें सांस ले सकें।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई: पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
वैज्ञानिक छंटाई
मानसून से ठीक पहले पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई हो, ताकि तेज हवाओं में वे असंतुलित न हों।
पेड़ हमारी ढाल हैं, कोई खतरा नहीं। समय रहते अगर हमने कंक्रीट के इस जाल को नहीं हटाया तो विकास की यह अंधी दौड़ हमारे पर्यावरण को पूरी तरह तबाह कर देगी।

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