एस रावत
अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में क्या मुंह की खानी पड़ी, डोनाल्ड ट्रंप एकदम बैकफुट पर आ गए हैं। आते ही उन्होंने दो बड़े ऐलान कर डाले, जिसमें दुनिया के लिए एक वाकई सुकून भरी खबर है। ‘फायनांशियल टाइम्स’ से बातचीत में ट्रम्प ने साफ कर दिया कि ईरान पर हमला करने का उनका दूर-दूर तक कोई इरादा नहीं है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होगी और उसकी तारीख भी जल्द ही पक्की हो जाएगी। इससे पहले, ट्रंप ने मचलते हुए इजराइल को मिलने वाली सालाना ४ अरब डॉलर की मदद पर भी कैंची चलाने का ऐलान कर दिया। मीडिया से गपशप करते हुए ट्रम्प बोले, ‘हमने इजरायल के प्राइम मिनिस्टर को इस पैâसले की खबर दे दी है। अब से हम इजरायल को फूटी कौड़ी यानी आर्थिक मदद नहीं देंगे, हां… हथियार बेचने का धंधा चालू रहेगा।’
ईरान पर नो-अटैक वाला फॉर्मूला,
भारत के लिए बड़ी राहत
भई, ईरान पर हमला टलने की यह खबर दुनिया के साथ-साथ अपने भारत के लिए भी चैन की सांस लेने जैसी है। अगर कहीं ईरान से पंगा होता और वे होर्मुज की खाड़ी बंद कर देते, तो ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम आसमान छूने लगते। और अंत में, आम आदमी की जेब पर ही भारी चपत लगती।
देखते हैं इस बातचीत का क्या गुल खिलाता है
‘फायनांशियल टाइम्स’ से आगे बोलते हुए ट्रंप ने कहा, ‘ईरान पर आगे अटैक करने की कोई प्लानिंग नहीं है। सिचुएशन अब ठीक है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, दोनों देशों में बातचीत का दौर जारी है। ‘हम बात कर रहे हैं, देखते हैं इसका क्या नतीजा निकलता है।’ वैसे, मंडे (२ नवंबर) को ही अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हाथ साफ किया था। मिडटर्म वोटिंग से ठीक पहले यह एक्शन लिया गया था, पर ट्रंप को इसका चुनावी फायदे की बजाय नुकसान ही उठाना पड़ा। चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस और सीनेट दोनों जगहों पर बुरी तरह पिट गई है। ताजा आंकड़ों के हिसाब से सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी काफी पीछे छूट गई है और कांग्रेस पर विपक्षी डेमोक्रेट्स का कब्जा होना तय है।
तो भई, ट्रंप ने अचानक ये दो यू-टर्न क्यों लिए?
महंगाई की मार: एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती महंगाई ही ट्रंप की लुटिया डूबने की असली वजह है। ईरान से पंगे और युद्ध के चक्कर में अमेरिकी जनता महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रही थी और ट्रम्प इसे कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे। मिडटर्म इलेक्शन में महंगाई सबसे बड़ा हॉट टॉपिक था।
बहुमत का टोटा: कांग्रेस में अब ट्रम्प की पार्टी के पास बहुमत बचा नहीं है। ऐसे में अपनी मर्जी से कोई नया युद्ध शुरू करना उनके बाएं हाथ का खेल नहीं रहा। कांग्रेस उनके हर पैâसले की बखिया उधेड़ सकती है, यानी पूरी समीक्षा होगी।
इजरायल की पॉलिटिकल खिचड़ी: इजरायल में राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है। बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी को साफ बहुमत मिला नहीं है, और गठबंधन करके गादी आयजनकोट सरकार बना सकते हैं। शायद यही वजह है कि ट्रम्प ने थोड़ा साइड होना ही बेहतर समझा!
