मुख्यपृष्ठस्तंभट्रंप की सनक और सत्ता का अहंकार

ट्रंप की सनक और सत्ता का अहंकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और व्यवहार को लेकर विवादों में हैं। NBC के ‘Meet the Press’ इंटरव्यू में पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ने जब वैâलिफोर्निया चुनाव और धांधली के उनके दावों पर सवाल उठाए, तो ट्रंप भड़क गए। उन्होंने मीडिया को बेईमान बताया, पत्रकार पर तीखी टिप्पणी की और अंत में इंटरव्यू बीच में छोड़कर चले गए। लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकारिता का धर्म है, लेकिन ट्रंप के लिए हर असहज सवाल मानो व्यक्तिगत हमला बन जाता है। ट्रंप की समस्या केवल पत्रकारों से नहीं है, बल्कि उस हर संस्था से है जो उनसे प्रमाण मांगती है। चुनाव में हार या प्रतिकूल परिणाम आते ही वे धांधली का राग छेड़ देते हैं। वैâलिफोर्निया के चुनावों को लेकर भी उन्होंने बिना ठोस प्रमाण गंभीर आरोप लगाए। यही रवैया अमेरिकी लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। भारत-पाकिस्तान समझौते को लेकर भी ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने दोनों देशों को व्यापार रोकने की धमकी देकर युद्ध से रोका। यह दावा वे कई बार दोहरा चुके हैं, मानो विश्व राजनीति उनकी निजी सौदेबाजी से चलती हो। इसके साथ ही माइकल सैवेज जैसे विवादित रेडियो होस्ट की भारत और चीन को लेकर अपमानजनक टिप्पणी वाले कंटेंट को आगे बढ़ाना भी उनकी सोच पर सवाल खड़े करता है।
ट्रंप की राजनीति में आक्रामकता, आत्ममुग्धता और तथ्यहीन दावे लगातार बढ़ते दिख रहे हैं। सवाल यह है कि क्या दुनिया की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठा व्यक्ति आलोचना सहने की क्षमता रखता है। लोकतंत्र में नेता जवाबदेह होता है, लेकिन ट्रंप जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कटघरे में खड़ा कर देते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक कमजोरी है।

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